Mar 25, 2020

sindhu ghati sabhyata

sindhu ghati sabhyata
sindhu ghati sabhyata
sindhu ghati sabhyata मतलब harappa sabhyata के बारे में जानने से पहले हमें यह जानना जरूरी हैं की आखिर सभ्‍यता होती क्‍या हैं? civilization in hindi?
''एक सभ्यता, एक मानव समाज है जिसका अपना सामाजिक संगठन और संस्कृति है।'' अर्थात् sindhu ghati sabhyata भी एक ऐसी ही सभ्‍यता थी जिसका अपना सामाजिक संगठन और संस्‍कृति थी। तथा सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता, प्राचीन भारतीय इतिहास ancient indian history का एक भाग मानी जाती हैं। तो चलिए sindhu ghati sabhyata के बारे में बहुत कुछ जानने हैं। परन्‍तु बहुत कुछ जानने से पहले हमें कुछ छोटी और महत्‍वपूर्ण बात का ज्ञान होना आवश्‍यक हैं जैसे इस सभ्‍यता का काल निर्धारण कब से कब तक माना जाता है। तथा इस सभ्‍यता का विस्‍तार कहॉं-कहॉं माना जाता हैं और इस सभ्‍यता में कुल स्‍थलों की संख्‍या लगभग कितनी थी। तो चलिए हम आज इस लेख की मदद से इन कुछ महत्‍वपूर्ण बातो के बारे में जानते हैं।

sindhu ghati sabhyata का काल निर्धारण लगभग 2300 ईसा पूर्व से 1700 ईसा पूर्व तक माना जाता है। क्‍याोकिं ऐसा माना जाता हैं कि इस काल के बाद लगभग 1500 ईसा पूूूूर्व से वैदिक सभ्‍यता का प्रारम्‍भ हो चुका था। ( ईसा एवं ईसा पूर्व में अंतर )। और अब यदि हम बात करें इस सभ्‍यता के कुल स्‍थलों की तो उनकी संख्‍या लगभग 1400 मानी जाती है जिनमें से सर्वाधिक लगभग 1100 स्‍थल भारत में व शेष पाकिस्‍तान में माने जाते हैं। और बात यदि भारत में भी सर्वाधिक स्‍थल कहॉं है इसकी करी जाये, तो ये गुजरात में हैं लगभग 400 स्‍थल।

अब बात यदि हम सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के विस्‍तार की करें। या फिर हम Sindhu ghati sabhyata map की बात करे तो इसका विस्‍तार  लगभग 1299600 sq. km. माना जाता तथा पूर्व से पश्चिम तक सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता का विस्‍तार 1600 km. और उत्‍तर से दक्षिण  1400 km. माना जाता हैं। इस सभ्‍यता का सबसे उत्‍तरी बिन्‍दू माण्‍डा (जम्‍मू) तथा दक्षिणी बिन्‍दू दायमावाद (महाराष्‍ट्र) को और पूर्वी बिन्‍दू मेरठ (आलमगिरपुर) को तथा पश्चिमी बिन्‍दू सुत्‍कांगेडोर (बलूचिस्‍तान) को माना जाता हैं। दोस्‍तों आज हम इस लेख की सहायता से कई प्रश्‍नों के उत्‍तर भी जानने की कोशिश करेंगे जैसेे-
Sindhu ghati sabhyata ki khoj kab hui?
Sindhu ghati sabhyata ki khoj kisne ki?
Sindhu ghati sabhyata ki lipi thi?
sindhu ghati sabhyata ki lipi konsi hai?
तो चलिए जानते है Sindhu ghati sabhyata question के उत्‍तर, वो भी विस्‍तार से-
तो सबसे पहला प्रश्‍न यह हैं कि इस सभ्‍यता की खोज किसने की और कब की तो सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के विषय में सर्वप्रथम सूचना 1826 में चार्ल्‍स मैैैैैसेन ने दी थी तथा इस सभ्‍यता की प्रथमत: खुदाई 1856 में जॉन ब्रेण्‍डन एवं विलियम ब्रेण्‍डन ने कि थी। इसके पश्‍चात् 1904 में लार्ड कर्जन द्वारा जॉन मार्सल को भारतीय पुरातात्विक विभाग का महानिदेशक नियुक्‍त किया गया। और 1921 में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष सार जॉन मार्सल के नेतृत्‍व में दयारााम सहानी ने उत्‍खन्‍न कर हड़प्‍पा की खोज की इस कारण ही प्रथमत: इसका नाम harappa sabhyata रखा गया। harappa sabhyata की खोज के कुछ समय पश्‍मात् ही 1922 में राखाल दास बेनर्जी द्वारा सिन्‍ध क्षेत्र मेंं मोहनजोदड़ो की खोज की गई।

अब हम जानते हैं कि sindhu ghati sabhyata ki lipi konsi hai? ओर कौन सी थी?
तो मैं आपको बता दू की इस लिपि में 64 मूल चिन्‍ह थे, जो अधिकांशता सिन्‍धु घाटी की मोहरो पर प्राप्‍त होते हैं। प्रथमत: लिपि की जानकारी 1853 में हुई। तथा 1923 तक सारी लिपि पहचान ली गई परन्‍तु अभी भी इसे पढ़ा नही जा सका हैं। यह लिपि पिकटोग्राफ अर्थात् चित्रात्‍मक लिपि थी। जो दॉंये से बाये लिखि जाती हैं। यह पद्धति बुस्ट्रोफेदन Boustrophedon कहलाती हैं। तथा इस लिपि में सर्वाधिक चित्र U आकार के एवं मछली आकृति के प्राप्‍त हुए हैं।

Sindhu ghati sabhyata ki visheshta
सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता की विशेषताऍं 


सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता की अनेक विशेषताऍं हैं जिनमे से कुछ इस प्रकार है-

राजनैतिक स्‍वरूप (political petern)
सामाजिक जीवन (social petern)
आर्थिक व्‍यवस्‍था (economey)
नगर नियोजन (town planning)
शिल्‍प कला एवं तकनीकी ज्ञान (Craft and technical knowledge)
मोहरे (seal)
धर्म (religion)

राजनैतिक स्‍वरूप (political petern)

1. प्रो. ब्‍हीलर ने शासन का स्‍वरूप जलतन्‍त्रात्‍मक माना हैं। जिसमें धन की प्रधानता थी।
2. सिन्‍धु सभ्‍यता के समस्‍त नगरों में एकरूपता तथा नगरनियोजन यह प्रमाि‍णित करते हैं कि कोई केन्‍द्रीकृत प्रणाली सभ्‍यता को नियंत्रित करती थी।
3. लगभग सभी इतिहासकारों ने धन एवं व्‍यापारी वर्ग के प्रभाव को स्‍वीकार किया है।

सामाजिक जीवन (social petern)

1. सम्‍भवता समाज मेें 4 वर्ग रहें होगे (a.पुरोहित, b.व्‍यापारी, c.शिल्‍पी, d.श्रमिक वर्ग)।
2. मातृ सत्‍तात्‍मक परिवार।

आर्थिक व्‍यवस्‍था (economey)

1. कास्‍य प्रौद्योगिकी आधारित नगरीयकरण।
2. भारत का प्रथम नगरीयकरण भी सिन्‍धु नदी घाटी क्षेत्र को ही माना जाता हैं।
3. मुख्‍य फसले- गेहूँ, जौ, मटर, तिल, सरसों।
4. सिन्‍धु सभ्‍यता के लोगो को ही विश्‍व में प्रथमता 'कपास' उत्‍पन्‍न करने का श्रेय दिया जाता हैं।
5. प्रमुख फल- नारियल, अनार, नीबु, केले, तरबूज, खरबूज इत्‍यादि।
6. हल के प्रयोग के प्रमाण भी इस सभ्‍यता से प्राप्‍त होते हैैंं।
7. पशुपालन के प्रमाण भी प्राप्‍त होते हैं।
8. विकसित शिल्‍पकला।

नगर नियोजन (town planning)

1. सिन्‍धु सभ्‍यता एक नगरीय सभ्‍यता थी। जिसमें पर्यावरण के अनुकूल नगर नियोजन एवंं जल निकास प्रणाली थी।
2. सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती थी। एवं सभ्‍यता के लगभग सभी नगर दो भागों में विभाजित थे।दुर्ग क्षेेेेत्र, नगर क्षेत्र
3. पकी ईटो का प्रयोग भी किया जाता था।

शिल्‍प कला एवं तकनीकी ज्ञान (Craft and technical knowledge)

1. धातु, मिट्टी एवं पत्‍थर की मुर्तिया।
2. मनके (बीडस), तथा सिन्‍धु सभ्‍यता की मोहरे।

मोहरे (seal)

सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता की मोहरे बेहरीन, इरान, कुबेत, अफगानिस्‍तान एवं मेसोपुटामिया इत्‍यादि क्षेत्रों से प्राप्‍त हुई हैं। harappa sabhyata की मोहरो को सेन्‍धव मोहरे भी कहा जाता हैं। सेन्‍धव मोहरो की अब तक की प्राप्‍त संख्‍या लगभग 2000 मोहरे हैं। सर्वाधिक मोहरो की प्राप्ति मोहनजोदड़ो से हुई लगभग 500 मोहरे।
इन मोहरो की आकृति चौकोर, बेलनाकार, वृत्‍ताकार एवं आयताकार हैं। तथा अधिकांश मोहरे सेलखड़ी से निर्मित हैं। और इसके अतिरिक्‍त तॉंबे से भी बनी हुई मिलती हैं।

धर्म (religion)

मातृ देवी की उपासना इनकी उपासना आदिशक्ति, जननी, वनस्‍पति देवी एवं उर्वरता की देवी के रूप में की जाती थी। ये सभी मिट्टी से बनी हुई, आग में तपाकर बनाई गयी मूर्तिया थी। (पत्‍थर से बनी हुई मातृदेवी की कोई भी मूर्ति अब तक प्राप्‍त नहीं हुई हैं।)
पशुपति की उपासना - मोहनजोदड़ो से अर्निस्‍ट मेकेे ने एक सील प्राप्‍त की हैं। जिस पर एक पुरूष देवता चित्रित हैं। जिसकी दायाी और हाथी और बाघ तथा बायी और एक गेण्‍डा तथा भैंसा हैं। तथा पैरो के पास दो हिरण चित्रित हैं। मार्शल ने इसे आदिशिव कहा हैं। तथा इस मोहर पर सात अक्षरो का एक अभिलेख हैं।
पशुपूजा - मोहरो पर गाय के अतिरिक्‍त अन्‍य सभी पशु चित्रित हैं। तथा मोहरो पर सर्वाधिक चित्रित पशु नन्‍दी मिलता हैं। मोहरो पर सर्वाधिक चित्रित काल्‍पनिक पशु एक सृंगी पशु हैं। क्‍योंकि इस सभ्‍यता से प्राप्‍त मोहरो पर काल्‍पनिक एवं वास्‍तविक दोनो प्रकार के पशु प्राप्‍त होते हैैं।
वृक्ष पूजा - मोहरो पर एवं वर्तनो पर पीपल, नीम, बबूल, खजूर, गन्‍ना तथा नीबू एवं केले के वृक्षों का चित्रण मिलता हैं।
अन्‍त्‍येष्‍टी संस्‍कार - अन्तिम संस्‍कार की पद्धतियों से धर्म के सिद्धन्तिक पक्ष अर्थात् दार्शनिकता पर प्रकाश पड़ता हैं। कब्र मेें प्राप्‍त वस्‍तुओं से परलौकिक जीवन में विश्‍वास की सूचना मिलती हैैं। 

Sindhu ghati sabhyata se sam‍bandhit mahat‍vapoorn s‍thal
सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता से सम्‍बन्धित महत्‍वपूर्ण स्‍थल

sindhu ghati sabhyata
sindhu ghati sabhyata

हड़प्‍पा - 

हड़प्‍पा एक ऐसा स्‍थान जिसकी खोज सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के लगभग 1400 स्‍थानों में से सर्वप्रथम की गई। तथा इसकी खोज 1921 में दयाराम सहानी द्वारा की गई। अब सवाल यह है कि आखिर Harappa kis nadi ke kinare sthit hai तो हड़प्‍पा रावी नदी के तट पर पंजाब प्रांत(वर्तमान पाकिस्‍तान) में स्थित हैं। इसकी खुदाई में विशाल दुर्ग, कब्रिस्‍तान, माउण्‍ट A-B (एक प्रकार का टीला), अन्‍नागार, श्रमिक आवास, एवं लकड़ी के ताबूत में एक शव इत्‍यादि वस्‍तुऍं प्राप्‍त हुई।

मोहनजोदड़ो -

मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ मृतको का टीला होता हैं। मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में राखल दास बनर्जी द्वारा सिन्‍धु नदी के किनारेे वर्तमान पाकिस्‍तान के सिन्‍ध प्रान्‍त में की गई। मोहनजोदड़ो की खुदाई में वृहद स्‍नानाघार(ग्रेट बाथ), मातृदेवी की मूर्तिया, कास्‍य नृतिकी, पशुपति की आकृति वाली मोहर एवं पुरोहितावास इत्‍यादि कई महत्‍वपूर्ण वस्‍तुऍं प्राप्‍त हुई हैं। और मोहनजोदड़ो से अभी तक कोई भी कब्र प्राप्‍त नही हुई हैं।

कालीबंगा -

कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ काले रंग की चूडि़या होता हैं। तथा कालीबंगा की खोज राजस्‍थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्‍घर नदी के किनारे हुई। कालीबंगा से अग्नि कुण्‍ड के प्रमाण, एवं जुते हुए खेत के प्रमाण भी प्राप्‍त होते हैं।

लोथल -

Lothal kahan sthit hai एवं Lothal kis nadi ke kinare sthit hai ये दोनों प्रश्‍न सामान्‍य तौर पर काफी प्रचलित हैं। ओर इन दोनाे प्रश्नों का उत्‍तर हमें भी मालूम होना चाहिए तो चलिए जानते हैं कि अखिर Lothal kahan sthit hai एवं  Lothal kis nadi ke kinare sthit hai  तो  लोथल की खोज 1955 में प्रो. एस. आर्. राव ने भोगवा नदी के किनारे अहमदाबाद जिला(गुजरात) में की तथा यहा से प्राप्‍त वस्‍तुओं की बात करे तो यहॉं से हमें बंदरगाह, धान के प्रमाण, तॉंबे से निर्मित कुत्‍ते की मूर्ति इत्‍यादि वस्‍तुऍं प्राप्‍त हुई हैं।

धोलावीरा -

धोलावीरा की खोज गुजरात के कच्‍छ जिले में की गई तथा इस नगर को सिन्‍धु सभ्‍यता का सबसे बड़ा नगर माना जाता है (जोकि आकार के आधार पर हैैंं)। harappa sabhyata की लिपि के सबसे बड़े आकार के अक्षरों की प्रतिकृति भी यही से प्राप्‍त होती हैं।

इस प्रकार से सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के अनेक स्‍थल हैं जैसे - बनावली, चंगूदड़ो, रंगपुर, सुत्‍कांगेड़ोर, सुत्‍कोतड़ा, कोटदीजी, रोजदी, आलमगीरपुर, मांडा, बालाकोट, एवं सोत्‍काकोह इत्‍यादि । ओर इन सभी के अलावा भी सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता में लगभग 1400 स्‍थल और प्राप्‍त होते हैं।

Sindhu ghati sabhyata ka patan
सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता का पतन 


Sindhu ghati sabhyata के पतन के विषय में अलग-अलग विद्धानो ने अपने अलग-अलग पतन प्रस्‍तुत किये है। जैसे कि जॉन मार्सल द्वारा, सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के पतन का कारण प्रशासनिक स्थिलता एवं बाण को बताया गया हैं। जॉन मार्सल की तरहा ही अर्नेस्‍टमैके एवं प्रो. एस.आर. राव ने भी harappa sabhyata का पतन का कारण बाण को ही बताया हैं। ओर इसके अलावा ऑरेल स्‍टाइन ने जलवायुु परिवर्तन को एवं एम.आर. सहानी और एच.टी.लेम्बिक ने भूतात्विक परिवर्तन को harappa sabhyata का पतन का कारण बताया हैं। इसके अलावा भी कई मत मिलते है जैसे प्रथमत: 1934 में वी.गार्डन चाइल्‍ड ने यह मत दिया कि Sindhu ghati sabhyata ka patan का कारण आर्यो का आक्रमण था। और इसी मत को प्रो. व्‍हीलर ने भी सही माना और उन्‍होने भी यही मत दिया। तथा के.आर.यू.केनेड़ी ने Sindhu ghati sabhyata केे पतन का कारण महामारी को बताया।  

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