Mar 13, 2020

indian history in hindi

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indian history in hindi मतलब भारत का इतिहास हिन्‍दी में  दोस्‍तों जैसा की आप इस title को पढकर समझ ही गये हो की आज हम बात करने वाले हैं indian history की ओर इसमें भी हम बात करेंगे ancient indian history in hindi जी हॉं। आज हम बात करने जा रहे हैं प्राचीन भारतीय इतिहास हिन्‍दी में ओर इसी बीच हम अनेक अच्‍‍छी बात को भी जानने की कोशिश करेंगे जो हमारे ancient indian history in hindi के general knowledge को तो बढ़ायेगा ही और साथ-ही-साथ हमें general knowledge quiz, general knowledge question answer, को भी solve करने में भी मदद करेंगा और जोकि general knowledge in hindi के हिसाब से काफी महत्‍वपूर्ण होगा। तो चलिए जानते है indian history in hindi  भारत का इतिहास हिन्‍दी में। 
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उत्‍तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में समुद्र तक फैला यह उपमहाद्वीप भारतवर्ष के नाम से जाना जाता है, जिसे महाकाव्‍य तथा पुराणों में भारतवर्ष अर्थात् 'भरत का देश' तथा यहॉं के निवासियों को भारती अर्थात् 'भरत की संतान' कहा गया है। युनानियों ने भारत को इंडिया तथा मध्‍यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने 'हिन्‍द' अथवा 'हिन्‍दुस्‍तान' के नाम से संबोधित किया है। indian history भारतीय इतिहास को अध्‍ययन की सुविधा के लिए तीन भागों में बॉंटा गया है- ancient india प्राचीन भारत, medieval india मध्‍यकालीन भारत, modern india आधुनिक भारत। तथा उपलब्‍ध सामग्रीयों के आधार पर प्राचीन भारतीय इतिहास ancient indian history के पुरातात्विक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक घटनाओं की जानकारी प्राप्‍त होती हैं। और प्राचीन भारतीय इतिहास Ancient indian history को स्रोतो की विविधता के आधार पर तीन भागों में बाटा गया है-

prehistoric period प्रागैतिहासिक काल 

semi historical period आर्द्ध एतिहासिक काल

historical period एतिहासिक काल

दोस्‍तों इससे पहले की हम आगे ओर अधिक जाने। हमें एक चीज का ज्ञान होना काफी आवश्‍यक है ओर वह है कि हमें ''ईसा पूर्व एवं ईसा'' में अन्‍तर पता होना चाहिए तो चलिए जानते हैं। कि ईसा पूर्व और ईसा में आखिर अन्‍तर है क्‍या? तो में आपको बता दू कि वर्तमान में प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर (Christian calendar/Julian calendar) ईसाई धर्मगुरू ईसा मसीह के जन्‍म-वर्ष(कल्पित) पर आधारित है। ईसा मसीह के जन्‍म के पहले के समय को ईसा पूर्व (B.C.-Before the birht of Jesus Chirst) कहा जाता है। तथा ईसा मसीह की जन्‍म-तिथि से आरंभ हुआ सन्, ईसवी सन् कहलाता है, इसके लिए संक्षेप में ई. लिखा जाता है। ई. को लैटिन भाषा के शब्‍द A.D.में भी लिखा जाता है।  A.D. यानी  Anno Domini का शाब्दिक अर्थ हैं- In the year of lord (Jesus Chirst)
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prehistoric period प्रागैतिहासिक काल

perhistoric period इतिहास का वह कालखण्‍ड जिसके विषय में जानकारी का एक मात्र स्रोत पुरातत्‍व है। इस काल के विषय में लिखित प्रमाण उपलब्‍ध नही हैं। तथा इस काल को मानव उत्‍पत्ति से 3000 ईसा पूर्व तक माना जाता हैं। 

semi historical period आर्द्ध एतिहासिक काल

semi historical period इतिहास का वह कालखण्‍ड जिसके विषय में ‍लिखित साम्रग्री उपलब्‍ध किन्‍तु उसे पड़ा नही जा सकता हैं। तथा इस काल को 3000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तक माना जाता हैं। जैसे- सिंधु घाटी सभ्‍यता। 

historical period एतिहासिक काल

historical period इतिहास का वह काल जिसके विषय में लिखित प्रमाण उपलब्‍ध है तथा जिन्‍हे पड़ा भी जा सकता हैं। जैंसे - अशोक के अभिलेख इत्‍यादि।  
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तो दोस्‍तो ये तो हुई indian history in hindi (भारत का इतिहास हिन्‍दी में) की बात अध्‍ययन की दृष्टि से परन्‍तु indian history in hindi (भारत का इतिहास हिन्‍दी में) को स्रोतो के आधार पर भी वर्गीकृत किया गया हैं। जोकि इस प्रकार हैं। 

प्राचीन भारतीय इतिहास हिन्‍दी में ancient indian history in hindi के विषय में जानकारी मुख्‍यत: चार स्रोतों से प्राप्‍त होती है- धर्मग्रंथ, ऐतिहासिक ग्रंथ, विदेशियों का विवरण, पुरातत्‍व संबंधी साक्ष्‍य।

धर्मग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथ से मिलने वाली महत्‍वपूर्ण जानकारी
भारत का सर्वप्राचीन धर्मग्रंथ वेद है, जिसके संकलनकर्ता महर्षि कृष्‍ण द्वैपायन वेदव्‍यास को माना जाता है। वेद चार हैं- ऋग्‍वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद। 
ऋग्‍वेद- ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्‍वेद कहा जाता है। इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्‍त एवं 10,462 ऋचाऍं हैं। तथा इस वेद के ऋचाओं के पढ़ने वाले ऋषि को 'होतृ' कहते हैं। 
यजुर्वेद- सस्‍वर पाठो के लिए मंत्रों तथा बलि के समय अनुपालन के लिए नियमों का संकलन यजुर्वेद कहलाता है। तथा इसके पाठकर्ता को 'अध्‍वर्यु' कहते हैं।
सामवेद- यह गायी जा सकने वाली ऋचाओं का संकलन है। इसके पाठकर्ता को उद्रातृ' कहते हैं। तथा इसे भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है। 
अर्थवेद- अथर्वा ऋषि द्वारा रचित इस वेद में रोग, निवारण, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, शाप, वशीकरण, आशीर्वाद, स्‍तुति, प्रायश्चित, औषधि, अनुसंधान, ‍विवाह, प्रेम, राजकर्म, मातृभूमि-महात्‍मय आदि ‍विविध विषयों से संबद्ध मंत्र तथा सामान्‍य मनुष्‍यों के ‍विचारों, विश्‍वासों, अंधविश्‍वासों इत्‍यादि का वर्णन है। 

विदेशी यात्रियों से ‍मिलनेवाली प्रमुख जानकारी 
इसे भी अलग-अलग रूप से विभाजित किया गया है जैसे- यूनानी-रोमन लेखक, चीनी लेखक, अरबी लेखक। चलिए हम एक-एक करके समझते हैं।
यूनानी-रोमन लेखक- यूनानी-रोमन लेखक अनेक थे जिन्‍होंने भारत के बारे में काफी कुछ लिखा है और सभी ने अपने-अपने नजरिये से भारत का ‍विवरण ‍दिया हैं। उनमें से कुछ के नाम कुछ इस प्रकार है- टेसियस, हेरोडोटस, ‍निर्याकस, आनेसिक्रटस, आस्टिोबुलस, मेगास्‍थनीज, डाइमेकस,डायोनिसियस, टॉलमी, प्लिनी तथा पेरीप्‍ल ऑफ द इरिथ्रयन-सी इत्‍यादि। 
चीनी लेखक- यूनानी लेखको की तरहा ही अनेक चीनी लेखक भी भारत आये जैसे- फाहियान, संयुगन, हृेनसॉंग तथा इत्सिंग इत्‍यादि। 
अरबी लेखक- अरबी लेखको में मुख्‍य रूप से अलबरूनी एवं इब्‍न बतूता ही महत्‍वपूर्ण हैं। 
इन सभी के अलावा भी कई लेखक है। जैसे- तारानाथ तथा मार्कोपोलो इत्‍यादि।

पुरातत्‍व संबंधी साक्ष्‍य से मिलनेवाली जानकारी 
पुरातात्विक स्रोतो के अन्‍तर्गत अभिलेख, स्‍मारक एवं भवन, मुद्राये, मूर्तिया, चित्रकला एवं मोहरे इत्‍यादि शामिल हैं। प्राचीनतम सिक्‍के आहृत सिक्‍के कहलाते थे। तथा भारत में प्राचीनतम स्‍मारक एवं भवन हड़प्‍पा एवं मोहन जोदड़ो से प्राप्‍त हुऍं हैं। और भारत में प्राचीनतम स्‍मारक बौद्ध धर्म से संबंधित है जिसमें मुख्‍यत: स्‍तूप, बिहार एवं चेत्‍य शामिल हैं। तथा भारत में प्राचीनतम उपलब्‍ध मूर्तिया सिन्‍धु सभ्‍यता से प्राप्‍त मानी जाती हैं। मोहरे मुख्‍यत: ‍सिन्‍धु सभ्‍यता से संबंधित हैं। ‍सिंधु सभ्‍यता के इतिहास लेखन में मोहरे सर्वाधिक महत्‍व रखती हैं।

तो दोस्‍तो अभी तक हमने indian history in hindi भारत का इतिहास हिन्‍दी में को अध्‍ययन एवं स्रोतो की दृष्टि से समझा परन्‍तु अभी हमे थोड़ा और समझने की जरूरत हैं। तो चलिए prehistoric period, semi historical period और historical period को थोड़ा और समझते है। 


1. prehistoric period प्रागैतिहासिक काल 
मानव के उद्भव का समय लगभग 14 लाख ई.पू. से 10 लाख ई.पू. के बीच माना जाता है। आधुनिक मानव होमोसेपियन्‍स का प्राद्रुुुुुुभाव लगभग 30 हजार ई.पू. मानी जाती है। प्रागैतिहासिक काल को तीन भागों में विभाजित किया गया हैं- पुरा पाषाण काल palaeolithic age, मध्‍य पाषाण काल mid-stone age, नव पाषाण काल new stone age
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prehistoric period


palaeolithic age पुरा पाषाण काल- 

प्रारम्‍भ से 10 हजार ई.पू. तक। भारत में प्रथमत: 'राबर्ड ब्रूश फुट' 1863 ने मद्रास के पास 'पल्‍लवरम्' से पुरा पाषाण कालीन उपकरण प्राप्‍त किये। 

mid-stone age मध्‍य पाषाण काल- 

10 हजार से 4 हजार ई.पू. तक। सूूक्ष्‍म पाषाण उपकरण की प्राप्ति के कारण इसे 'माइक्रो लिथिक ऐज' भी कहा जाता हैं। 

new stone age नव पाषाण काल- 

7 हजार से 1 हजार ई.पू. तक। कृषि के प्राचीनतम प्रमाण भी इसी काल में प्राप्‍त हुई। वर्तमान भारत में मिर्जापुर जिले में स्थित कोल्‍डी हवा (5 हजार ई.पू.) में चावल के दाने प्राप्‍त हुए। 
ताम्र पाषाण काल- 4 हजार ई.पू. से 1 हजार ई.पू तक। धातु उपयोग का काल भी कहा जाता हैं। तथा प्रथमत: नगरीयकृत स्‍थल भी प्राप्‍त होतेे है।

2. semi historical period आर्द्ध एतिहासिक काल
आर्द्ध एतिहासिक काल इतिहास का वह कालखण्‍ड जिसका सबसे अच्‍छा उदाहरण सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता को माना जा सकता है। 
सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के विषय में सर्वप्रथम सूचना 1826 में 'चाल्‍स मेसोन' ने दी। परन्‍तु इसकी प्रथमत: खुदाई 1856 में की गई। 1921 में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष 'सर जॉन मार्सल' के नेतृत्‍व में 'दयाराम सहानी' ने उत्‍खन्‍न कर 'हड़प्‍पा' की खाेेेज की । इस कारण ही प्रथमत: इसका नाम हड़प्‍पा सभ्‍यता रखा गया। 
1922 में 'राखाल दास बेनर्जी' द्वारा सिन्‍ध क्षेत्र में 'मोहनजोदड़ो' की खोज की गई।
  
3. historical period एतिहासिक काल 
historical period you want to know more about ऐतिहासिक काल जिसके बारे में आप अधिक जानना चाहते हैंं उस काल का प्रारम्‍भ मुख्‍य रूप से महाजनपद काल से होता हैं क्‍योंकि इस समय राज्‍य निर्माण का प्रारम्‍भ, लोहे का व्‍यापक प्रयोग, व्‍यापार, वाणिज्‍य का प्रारम्‍भ, नवीन धर्मो का उदय का काल एवंं नगरीयकरण का प्रारम्‍भ होता हैं।  
दोस्‍तो मैं उम्‍मीद करता हूँ की indian history in hindi भारत का इतिहास हिन्‍दी में का यह लेख आपको काफी अच्‍छा लगा होगा और इस लेख को पढ़कर आपके काफी प्रश्‍नों के उत्‍तर भी आपको मिल गयेे हो। 
धन्‍यवाद।

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