Mar 8, 2020

bharat me european companiyon ka aagman pdf

भारत में यूरोपीय कंपनियों  का आगमन 
The arrival of European companies in India

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन pdf
flag of european countries

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन 15 वी शताब्‍दी के मध्‍यकाल में हुआ क्‍योंकि 15 वी शताब्दी तक यूरोप में नई भौगोलिक खोजो जैसे दिशा सूचक यंत्र तथा जहाज नर्माण आदि ने भौगोलिक खोजो को प्रोत्साहित किया। भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक संम्पन्नता, आध्यात्मिक उपलब्धियां, दर्शन, कला आदि से प्रभावित होकर मध्यकाल में बहुत से व्यापारियों एवं यात्रियों का यहाँ आगमन हुआ । 1488 ई०  में भारत आने के लिये केव ऑफ गुडहोप होकर एक नए सामुद्रिक मार्ग की खोज बार्थोलोम्यो डियाज द्वारा की गई। इसी क्रम में 1492 ई० में स्पेन का एक नाविक कोलम्बस भारत की खोज में निकला किन्तु भटककर अमेरिका पहुँच गया। ओर इस तरहा 1492 ई० में अमेरिका की खोज हुई। परन्तु अभी भी सभी यूरोपियन भारत को खोजने में असफल रहे। किन्तु ये इंतेज़ार अब खतम होने वाला था ओर 1498 ई० में वास्कोडिगामा भारत की खोज करने में सफल रहा। ओर इस तरहा 1498 ई० में भारत की खोज हुई।

Portuguess in india( भारत में पुर्तगाली ):-

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन pdf
portugess flag

प्रथम पुर्तगाली यात्री वास्कोडिगामा 17 मई, 1498 ई० को एक गुजराती व्यपारी अब्दुल मजीर की सहायता से भारत के कालीकट पहुँचा। वास्कोडिगामा का स्वागत कालीकट के तत्कालीन शाशक जमोरिन (यह कालीकट के शाशक की उपाधि थी) द्वारा किया गया । तत्कालीन भारतीय व्यापर पर अधिकार रखें वाले अरब व्यापारियों को जमोरिन का यह व्यवहार पसंद नहीं आया , अतः उनके द्वारा पुर्तगालियों का विरोध किया गया । इस प्रकार हम देखते है के पुर्तगालियों के भारत आगमन से भारत एवं यूरोप के मध्य व्यापार के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात हुआ । भारत आने और जाने में हुए यात्रा व्यय के बदले में वास्कोडिगामा ने करीब 60 गुना अधिक धन कमाया ।
1596 ई० में कर्नेलिस-डि-हाऊटमैन (Cornelis de Houtman) भारत आने वाला प्रथम डच नागरिक था। 1602 ई० में भारत आने वाली पुर्तगाली कम्पनी का नाम इस्तदो-डी-इण्डिया था। तथा प्रथम फेक्ट्री कोचीन में 1503 ई० स्थापित की। ओर इसी क्रम में पुर्तगाली कम्पनी के कई गवर्नर भारत आये जिनमें से प्रथम पुर्तगाली गर्वनर जो भारत आये वे थे फ्रांसिस्को-डी-अल्मीडा जो 1505 ई० में भारत आये। ओर जिनका कार्यकाल1509 तक रहा। इन्होंने blue water polishe को प्रारंभ किया जोकि एक सामुद्रिक नीति थी। अल्मीडा के बाद अगले पुर्तगाली गवर्नर जो भारत आये वे थे अल्फांसो-डी-अल्बुकर्क जो 1509 ई० में भारत आये ओर लगभग 1514 ई० तक भारत में पुर्तगालियों के गवर्नर के रूप में भारत मे रहे। 1510 ई० में अल्बुकर्क ने वीजापुर के शासक से गोवा जीत लिया। अल्बुकर्क के बाद के गवर्नर्स ने भारत में बम्बई, दमन एवं द्वीप , साष्टि एवं हुगली पर अपना कब्जा किया। किन्तु ये सभी क्षेत्र इनके पास अधिक समय तक नहीं रह सके और जिनमे से अधिकांश क्षेत्र उनके हाथों से निकल गए किन्तु गोवा, दमन एवं दीप पर पुर्तगालियों ने अपना कब्जा 1961 ई० तक बनाये रखा।

Dutch in india( भारत में डच ):-

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Dutch flag

पुर्तगालियो के बाद डच भारत आये। डच वर्तमान नीदरलैंड के निवासी थे। 1602 ई० में डच कम्पनी  वेरिगंदे ओस्टिंडिशे कंपनी स्थापित हुई जिसका एक अन्य नाम और था यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी ऑफ़ नीदरलैंड जोकि कई कंपनियों का एक समूह था। डचों ने भारत मे अपनी प्रथम फेक्ट्री 1605 ई० में मसूली पटनम आंध्रप्रदेश में स्थापित की। परन्तु डचों ने अपनी राजधानी नेगापटनम को बनाया था। डच कम्पनी की भारत से अधिक रुचि इंडोनेशिया के मसाला व्यापार में थीं। डचों ने भारत से नील, शोरा एवं सूती वस्त्रो का बहुत अधिक मात्रा में निर्यात किया।

डचों की भारत मे अन्य महत्वपूर्ण फेक्ट्रीयाँ :-

पुलिकट, सूरत, चिनसुरा, नेगापटनम एवं काशिम बाजार।
डचों ने भारत पर लगभग 150 वर्ष व्यपार किया और सन 1759 ई० में बेदरा के युद्ध मे अंग्रेजो ने डचों को अन्तिम रूप से पराजित किया ओर भारतीय व्यपार से अलग कर दिया।



British raj या british in india( ब्रिटिश राज या  भारत में ब्रिटिश ):-

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British flag

1599 ई० में जॉन मिलडिन हॉल नामक ब्रिटिश यात्री स्थल मार्ग से भारत आया। तथा 1599 ई० में ही मर्चेंट एडवेंचर्स नामक व्यापारियों के एक दल ने अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना की। ओर इसके बाद 1600 ई० में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ टेलर प्रथम ने कम्पनी को पूर्व के साथ व्यपार के लिए 15 वर्षों के लिए एकाधिकार पत्र प्रदान किया। इसे ही द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट ऑफ इंग्लैंड ट्रेडिंग टू दा ईस्ट इंडीज के नाम से जाना गया तथा संछिप्त में इसे ईस्ट इण्डिया कंपनी कहा गया।
ब्रिटिश राज की भारत मे प्रथम फेक्ट्री 1608 ई० में सूरत में स्थापित हुई। इसके बाद ब्रिटिश राज की एक ओर अन्य फैक्ट्री जोकि दक्षिण भारत की प्रथम फैक्ट्री थी 1611 ई० में मसूलीपटनम में स्थापित हुई। 1632 ई० में गोलकुण्डा के सुल्तान ने अंग्रेजों को एक सुनहला फरमान दिया जिसके अनुसार अंग्रेज सुल्तान को 500 पैगोडा वार्षिक कर देकर गोलकुण्डा राज्य के बंदरगाह पर स्वतंत्रता पूर्वक व्यापार कर सकते थे। 1687 ई० में अंग्रेजों ने पश्चिमी तट का मुख्यालय सूरत से हटा कर बम्बई को बनाया। 1674 ई० में फ्रांसिस मार्टिन ने पांडिचेरी की स्थापना की। 1760 ई० में अंग्रेजी सेना ने सर आयरकूट के नेतृत्व में वान्डीवाश की लड़ाई में फ्रांसीसियों को बुरी तरहा हराया। तथा 1761 ई० में अंग्रेजों ने पांडिचेरी को फ्रांसीसियों से छीन लिया। और 1763 ई० में हुई पेरिस सन्धि के द्वारा  अंग्रेजों ने चंद्रनगर को छोड़कर शेष अन्य प्रदेश को लौटा दिया, जो 1749 ई० तक फ्रांसीसियों के कब्जे में थे, ये प्रदेश भारत की आजादी तक फ्रांसीसियों के कब्जे में रहे।

French in india( भारत में फ्रेंच ):-

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French flag

1664 ई० में फ्रांस के सम्राट लुई 14th के वित्त मंत्री कॉलबर्ट ने फ्रेंच ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना की। फ्रांसीसी कम्पनी, फ्रांसीसी सरकार द्वारा स्थापित थी। तथा यह एक प्रकार की सरकारी कम्पनी थी। तथा इस फ्रेंच कम्पनी का नाम "कम्पनी द इंडसे ओरिएंटेड" company the indse oriantd था। भारत में फ्रांसीसियों ने अपनी प्रथम फेक्ट्री सूरत में 1668 ई० में स्थापित की। तथा इस फेक्ट्री के स्थापनकर्ता फ़्रेको कैरो थे। 1673 ई० में फ़्रेको मार्टिन ने बलीकोन्दपुरम के सूबेदार शेर खा लोदी से कुछ गाँव प्राप्त किये जिसे भविष्य में पांडुचेरी के नाम से जाना गया। तथा फ्रांसीसियों द्वारा 1721 ई० में मोरिसस ओर 1721 ई० में माहे पर अधिकार कर लिया गया। इस प्रकार 1740 ई० के बाद भारत मे अंग्रेजों एवं फ्रांसीसियों के मध्य राजनीतिक प्रतिस्पर्धा प्रारम्भ हुई। जिसमें अन्ततः अंग्रेजों की विजय हुई।

Note:- वर्ष 1616 ई० में फ्रांसीसियों से पहले एक डेनिस अर्थात डेनमार्क की एक कम्पनी का भी भारत में आगमन हुआ था। यह कम्पनी अधिक समय तक अंग्रेजों से प्रतिस्पर्धा नही कर पाई और वर्ष 1845 ई० में अपनी समस्त फैक्ट्रियों को अंग्रेजों को बेच कर भारत से चली गयी।
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