Mar 25, 2020

sindhu ghati sabhyata

March 25, 2020
sindhu ghati sabhyata
sindhu ghati sabhyata
sindhu ghati sabhyata मतलब harappa sabhyata के बारे में जानने से पहले हमें यह जानना जरूरी हैं की आखिर सभ्‍यता होती क्‍या हैं? civilization in hindi?
''एक सभ्यता, एक मानव समाज है जिसका अपना सामाजिक संगठन और संस्कृति है।'' अर्थात् sindhu ghati sabhyata भी एक ऐसी ही सभ्‍यता थी जिसका अपना सामाजिक संगठन और संस्‍कृति थी। तथा सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता, प्राचीन भारतीय इतिहास ancient indian history का एक भाग मानी जाती हैं। तो चलिए sindhu ghati sabhyata के बारे में बहुत कुछ जानने हैं। परन्‍तु बहुत कुछ जानने से पहले हमें कुछ छोटी और महत्‍वपूर्ण बात का ज्ञान होना आवश्‍यक हैं जैसे इस सभ्‍यता का काल निर्धारण कब से कब तक माना जाता है। तथा इस सभ्‍यता का विस्‍तार कहॉं-कहॉं माना जाता हैं और इस सभ्‍यता में कुल स्‍थलों की संख्‍या लगभग कितनी थी। तो चलिए हम आज इस लेख की मदद से इन कुछ महत्‍वपूर्ण बातो के बारे में जानते हैं।

sindhu ghati sabhyata का काल निर्धारण लगभग 2300 ईसा पूर्व से 1700 ईसा पूर्व तक माना जाता है। क्‍याोकिं ऐसा माना जाता हैं कि इस काल के बाद लगभग 1500 ईसा पूूूूर्व से वैदिक सभ्‍यता का प्रारम्‍भ हो चुका था। ( ईसा एवं ईसा पूर्व में अंतर )। और अब यदि हम बात करें इस सभ्‍यता के कुल स्‍थलों की तो उनकी संख्‍या लगभग 1400 मानी जाती है जिनमें से सर्वाधिक लगभग 1100 स्‍थल भारत में व शेष पाकिस्‍तान में माने जाते हैं। और बात यदि भारत में भी सर्वाधिक स्‍थल कहॉं है इसकी करी जाये, तो ये गुजरात में हैं लगभग 400 स्‍थल।

अब बात यदि हम सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के विस्‍तार की करें। या फिर हम Sindhu ghati sabhyata map की बात करे तो इसका विस्‍तार  लगभग 1299600 sq. km. माना जाता तथा पूर्व से पश्चिम तक सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता का विस्‍तार 1600 km. और उत्‍तर से दक्षिण  1400 km. माना जाता हैं। इस सभ्‍यता का सबसे उत्‍तरी बिन्‍दू माण्‍डा (जम्‍मू) तथा दक्षिणी बिन्‍दू दायमावाद (महाराष्‍ट्र) को और पूर्वी बिन्‍दू मेरठ (आलमगिरपुर) को तथा पश्चिमी बिन्‍दू सुत्‍कांगेडोर (बलूचिस्‍तान) को माना जाता हैं। दोस्‍तों आज हम इस लेख की सहायता से कई प्रश्‍नों के उत्‍तर भी जानने की कोशिश करेंगे जैसेे-
Sindhu ghati sabhyata ki khoj kab hui?
Sindhu ghati sabhyata ki khoj kisne ki?
Sindhu ghati sabhyata ki lipi thi?
sindhu ghati sabhyata ki lipi konsi hai?
तो चलिए जानते है Sindhu ghati sabhyata question के उत्‍तर, वो भी विस्‍तार से-
तो सबसे पहला प्रश्‍न यह हैं कि इस सभ्‍यता की खोज किसने की और कब की तो सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के विषय में सर्वप्रथम सूचना 1826 में चार्ल्‍स मैैैैैसेन ने दी थी तथा इस सभ्‍यता की प्रथमत: खुदाई 1856 में जॉन ब्रेण्‍डन एवं विलियम ब्रेण्‍डन ने कि थी। इसके पश्‍चात् 1904 में लार्ड कर्जन द्वारा जॉन मार्सल को भारतीय पुरातात्विक विभाग का महानिदेशक नियुक्‍त किया गया। और 1921 में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष सार जॉन मार्सल के नेतृत्‍व में दयारााम सहानी ने उत्‍खन्‍न कर हड़प्‍पा की खोज की इस कारण ही प्रथमत: इसका नाम harappa sabhyata रखा गया। harappa sabhyata की खोज के कुछ समय पश्‍मात् ही 1922 में राखाल दास बेनर्जी द्वारा सिन्‍ध क्षेत्र मेंं मोहनजोदड़ो की खोज की गई।

अब हम जानते हैं कि sindhu ghati sabhyata ki lipi konsi hai? ओर कौन सी थी?
तो मैं आपको बता दू की इस लिपि में 64 मूल चिन्‍ह थे, जो अधिकांशता सिन्‍धु घाटी की मोहरो पर प्राप्‍त होते हैं। प्रथमत: लिपि की जानकारी 1853 में हुई। तथा 1923 तक सारी लिपि पहचान ली गई परन्‍तु अभी भी इसे पढ़ा नही जा सका हैं। यह लिपि पिकटोग्राफ अर्थात् चित्रात्‍मक लिपि थी। जो दॉंये से बाये लिखि जाती हैं। यह पद्धति बुस्ट्रोफेदन Boustrophedon कहलाती हैं। तथा इस लिपि में सर्वाधिक चित्र U आकार के एवं मछली आकृति के प्राप्‍त हुए हैं।

Sindhu ghati sabhyata ki visheshta
सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता की विशेषताऍं 


सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता की अनेक विशेषताऍं हैं जिनमे से कुछ इस प्रकार है-

राजनैतिक स्‍वरूप (political petern)
सामाजिक जीवन (social petern)
आर्थिक व्‍यवस्‍था (economey)
नगर नियोजन (town planning)
शिल्‍प कला एवं तकनीकी ज्ञान (Craft and technical knowledge)
मोहरे (seal)
धर्म (religion)

राजनैतिक स्‍वरूप (political petern)

1. प्रो. ब्‍हीलर ने शासन का स्‍वरूप जलतन्‍त्रात्‍मक माना हैं। जिसमें धन की प्रधानता थी।
2. सिन्‍धु सभ्‍यता के समस्‍त नगरों में एकरूपता तथा नगरनियोजन यह प्रमाि‍णित करते हैं कि कोई केन्‍द्रीकृत प्रणाली सभ्‍यता को नियंत्रित करती थी।
3. लगभग सभी इतिहासकारों ने धन एवं व्‍यापारी वर्ग के प्रभाव को स्‍वीकार किया है।

सामाजिक जीवन (social petern)

1. सम्‍भवता समाज मेें 4 वर्ग रहें होगे (a.पुरोहित, b.व्‍यापारी, c.शिल्‍पी, d.श्रमिक वर्ग)।
2. मातृ सत्‍तात्‍मक परिवार।

आर्थिक व्‍यवस्‍था (economey)

1. कास्‍य प्रौद्योगिकी आधारित नगरीयकरण।
2. भारत का प्रथम नगरीयकरण भी सिन्‍धु नदी घाटी क्षेत्र को ही माना जाता हैं।
3. मुख्‍य फसले- गेहूँ, जौ, मटर, तिल, सरसों।
4. सिन्‍धु सभ्‍यता के लोगो को ही विश्‍व में प्रथमता 'कपास' उत्‍पन्‍न करने का श्रेय दिया जाता हैं।
5. प्रमुख फल- नारियल, अनार, नीबु, केले, तरबूज, खरबूज इत्‍यादि।
6. हल के प्रयोग के प्रमाण भी इस सभ्‍यता से प्राप्‍त होते हैैंं।
7. पशुपालन के प्रमाण भी प्राप्‍त होते हैं।
8. विकसित शिल्‍पकला।

नगर नियोजन (town planning)

1. सिन्‍धु सभ्‍यता एक नगरीय सभ्‍यता थी। जिसमें पर्यावरण के अनुकूल नगर नियोजन एवंं जल निकास प्रणाली थी।
2. सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती थी। एवं सभ्‍यता के लगभग सभी नगर दो भागों में विभाजित थे।दुर्ग क्षेेेेत्र, नगर क्षेत्र
3. पकी ईटो का प्रयोग भी किया जाता था।

शिल्‍प कला एवं तकनीकी ज्ञान (Craft and technical knowledge)

1. धातु, मिट्टी एवं पत्‍थर की मुर्तिया।
2. मनके (बीडस), तथा सिन्‍धु सभ्‍यता की मोहरे।

मोहरे (seal)

सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता की मोहरे बेहरीन, इरान, कुबेत, अफगानिस्‍तान एवं मेसोपुटामिया इत्‍यादि क्षेत्रों से प्राप्‍त हुई हैं। harappa sabhyata की मोहरो को सेन्‍धव मोहरे भी कहा जाता हैं। सेन्‍धव मोहरो की अब तक की प्राप्‍त संख्‍या लगभग 2000 मोहरे हैं। सर्वाधिक मोहरो की प्राप्ति मोहनजोदड़ो से हुई लगभग 500 मोहरे।
इन मोहरो की आकृति चौकोर, बेलनाकार, वृत्‍ताकार एवं आयताकार हैं। तथा अधिकांश मोहरे सेलखड़ी से निर्मित हैं। और इसके अतिरिक्‍त तॉंबे से भी बनी हुई मिलती हैं।

धर्म (religion)

मातृ देवी की उपासना इनकी उपासना आदिशक्ति, जननी, वनस्‍पति देवी एवं उर्वरता की देवी के रूप में की जाती थी। ये सभी मिट्टी से बनी हुई, आग में तपाकर बनाई गयी मूर्तिया थी। (पत्‍थर से बनी हुई मातृदेवी की कोई भी मूर्ति अब तक प्राप्‍त नहीं हुई हैं।)
पशुपति की उपासना - मोहनजोदड़ो से अर्निस्‍ट मेकेे ने एक सील प्राप्‍त की हैं। जिस पर एक पुरूष देवता चित्रित हैं। जिसकी दायाी और हाथी और बाघ तथा बायी और एक गेण्‍डा तथा भैंसा हैं। तथा पैरो के पास दो हिरण चित्रित हैं। मार्शल ने इसे आदिशिव कहा हैं। तथा इस मोहर पर सात अक्षरो का एक अभिलेख हैं।
पशुपूजा - मोहरो पर गाय के अतिरिक्‍त अन्‍य सभी पशु चित्रित हैं। तथा मोहरो पर सर्वाधिक चित्रित पशु नन्‍दी मिलता हैं। मोहरो पर सर्वाधिक चित्रित काल्‍पनिक पशु एक सृंगी पशु हैं। क्‍योंकि इस सभ्‍यता से प्राप्‍त मोहरो पर काल्‍पनिक एवं वास्‍तविक दोनो प्रकार के पशु प्राप्‍त होते हैैं।
वृक्ष पूजा - मोहरो पर एवं वर्तनो पर पीपल, नीम, बबूल, खजूर, गन्‍ना तथा नीबू एवं केले के वृक्षों का चित्रण मिलता हैं।
अन्‍त्‍येष्‍टी संस्‍कार - अन्तिम संस्‍कार की पद्धतियों से धर्म के सिद्धन्तिक पक्ष अर्थात् दार्शनिकता पर प्रकाश पड़ता हैं। कब्र मेें प्राप्‍त वस्‍तुओं से परलौकिक जीवन में विश्‍वास की सूचना मिलती हैैं। 

Sindhu ghati sabhyata se sam‍bandhit mahat‍vapoorn s‍thal
सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता से सम्‍बन्धित महत्‍वपूर्ण स्‍थल

sindhu ghati sabhyata
sindhu ghati sabhyata

हड़प्‍पा - 

हड़प्‍पा एक ऐसा स्‍थान जिसकी खोज सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के लगभग 1400 स्‍थानों में से सर्वप्रथम की गई। तथा इसकी खोज 1921 में दयाराम सहानी द्वारा की गई। अब सवाल यह है कि आखिर Harappa kis nadi ke kinare sthit hai तो हड़प्‍पा रावी नदी के तट पर पंजाब प्रांत(वर्तमान पाकिस्‍तान) में स्थित हैं। इसकी खुदाई में विशाल दुर्ग, कब्रिस्‍तान, माउण्‍ट A-B (एक प्रकार का टीला), अन्‍नागार, श्रमिक आवास, एवं लकड़ी के ताबूत में एक शव इत्‍यादि वस्‍तुऍं प्राप्‍त हुई।

मोहनजोदड़ो -

मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ मृतको का टीला होता हैं। मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में राखल दास बनर्जी द्वारा सिन्‍धु नदी के किनारेे वर्तमान पाकिस्‍तान के सिन्‍ध प्रान्‍त में की गई। मोहनजोदड़ो की खुदाई में वृहद स्‍नानाघार(ग्रेट बाथ), मातृदेवी की मूर्तिया, कास्‍य नृतिकी, पशुपति की आकृति वाली मोहर एवं पुरोहितावास इत्‍यादि कई महत्‍वपूर्ण वस्‍तुऍं प्राप्‍त हुई हैं। और मोहनजोदड़ो से अभी तक कोई भी कब्र प्राप्‍त नही हुई हैं।

कालीबंगा -

कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ काले रंग की चूडि़या होता हैं। तथा कालीबंगा की खोज राजस्‍थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्‍घर नदी के किनारे हुई। कालीबंगा से अग्नि कुण्‍ड के प्रमाण, एवं जुते हुए खेत के प्रमाण भी प्राप्‍त होते हैं।

लोथल -

Lothal kahan sthit hai एवं Lothal kis nadi ke kinare sthit hai ये दोनों प्रश्‍न सामान्‍य तौर पर काफी प्रचलित हैं। ओर इन दोनाे प्रश्नों का उत्‍तर हमें भी मालूम होना चाहिए तो चलिए जानते हैं कि अखिर Lothal kahan sthit hai एवं  Lothal kis nadi ke kinare sthit hai  तो  लोथल की खोज 1955 में प्रो. एस. आर्. राव ने भोगवा नदी के किनारे अहमदाबाद जिला(गुजरात) में की तथा यहा से प्राप्‍त वस्‍तुओं की बात करे तो यहॉं से हमें बंदरगाह, धान के प्रमाण, तॉंबे से निर्मित कुत्‍ते की मूर्ति इत्‍यादि वस्‍तुऍं प्राप्‍त हुई हैं।

धोलावीरा -

धोलावीरा की खोज गुजरात के कच्‍छ जिले में की गई तथा इस नगर को सिन्‍धु सभ्‍यता का सबसे बड़ा नगर माना जाता है (जोकि आकार के आधार पर हैैंं)। harappa sabhyata की लिपि के सबसे बड़े आकार के अक्षरों की प्रतिकृति भी यही से प्राप्‍त होती हैं।

इस प्रकार से सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के अनेक स्‍थल हैं जैसे - बनावली, चंगूदड़ो, रंगपुर, सुत्‍कांगेड़ोर, सुत्‍कोतड़ा, कोटदीजी, रोजदी, आलमगीरपुर, मांडा, बालाकोट, एवं सोत्‍काकोह इत्‍यादि । ओर इन सभी के अलावा भी सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता में लगभग 1400 स्‍थल और प्राप्‍त होते हैं।

Sindhu ghati sabhyata ka patan
सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता का पतन 


Sindhu ghati sabhyata के पतन के विषय में अलग-अलग विद्धानो ने अपने अलग-अलग पतन प्रस्‍तुत किये है। जैसे कि जॉन मार्सल द्वारा, सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के पतन का कारण प्रशासनिक स्थिलता एवं बाण को बताया गया हैं। जॉन मार्सल की तरहा ही अर्नेस्‍टमैके एवं प्रो. एस.आर. राव ने भी harappa sabhyata का पतन का कारण बाण को ही बताया हैं। ओर इसके अलावा ऑरेल स्‍टाइन ने जलवायुु परिवर्तन को एवं एम.आर. सहानी और एच.टी.लेम्बिक ने भूतात्विक परिवर्तन को harappa sabhyata का पतन का कारण बताया हैं। इसके अलावा भी कई मत मिलते है जैसे प्रथमत: 1934 में वी.गार्डन चाइल्‍ड ने यह मत दिया कि Sindhu ghati sabhyata ka patan का कारण आर्यो का आक्रमण था। और इसी मत को प्रो. व्‍हीलर ने भी सही माना और उन्‍होने भी यही मत दिया। तथा के.आर.यू.केनेड़ी ने Sindhu ghati sabhyata केे पतन का कारण महामारी को बताया।  

Mar 17, 2020

कोरोना वायरस क्‍या है हिन्‍दी में जाने सम्‍पूर्ण जानकारी

March 17, 2020

What is the corona virus?

कोरोना वायरस क्‍या है ?

What is the corona virus
NOVEL CORONA VIRUS

कोरोना वायरस
, वायरसो का एक बहुत बड़ा ग्रुप होता हैं। ये वायरस जानवरों में पाये जाते हैं। वैज्ञानिक इस वायरस को zoonotic कहते है। जिसका मतलब यह हैं की ये वायरस जानवरों से इसांनो में संचारित होता है। जो इंसानों में सामान्‍य जुखाम से लेकर के श्‍वसन तंत्र की गंभीर समस्‍या तक पैदा कर सकता है। 
कोरोना का नाम लेटिन शब्‍द कोरोना से लिया गया है जिसका मतलब होता हैं क्राउन यानी की सर का ताज इस वायरस का नाम इसके दिखने वाले रूप के ऊपर रखा गया है। ये दिखने में एक ताज की तरहा दिखता है जैसे की किसी राजा का ताज हो। कोरोना वायरस का लक्षण निमोनिया की तरहा ही हैं। जिसमें सर्दी, जुखाम और बुखार होता है। वैज्ञानिको के मुताबिक कोरोना वायरस एक वायरस नहीं है बल्कि ये एक वायरस(विषाणु) प्रकार का एक बहुत बड़ा समूह हैं। जिसमें ज्‍यादातर viruses इतनें खतरनाक नहीं होते लेकिन कोरोना के कुछ viruses ऐसे भी हैं जोकि गंभीर बीमारी पैदा कर सकते है। 
ऐसे दो तरहा के वायरस है 'middle east respiratory syndrome' जिसे MERS  कहा जाता है। और दूसरा हैं 'severe acute respiratory syndrome' जिसे SARS कहा जाता है। MERS वायरस पहली दफा सउदी अरब में 2012 में सामने आया था। उसके बाद ये धीरे-धीरे दूसरे देशो जैसों अफ्रीका, एशिया और यूरोप में फैल गया था। जबकि SARS वायरस पहली दफाह 2003 में सामने आया था। जिसकी वजह से पूरी दुनिया में लगभग 700 से ज्‍यादा लोगों की मौते हुई थी पूरी दुनिया में हजारों लोग इस वायरस से संक्रमित हुए थें। 
2015 के बाद से कोरोना वायरस के किसी भी प्रकार के वायरस का सामना किसी भी देश को नहीं करना पड़ा था। लेकिन दिसम्‍बर 2019 में फिर से   'WHO' डब्‍लूयएचओ (विश्‍व स्‍वास्‍थ संगठन) ने एक नए प्रकार के कोरोना वायरस की पहचान की जिसका नाम हैं नोबेल कोरोनावायरस है। ये वायरस भी   SARS की तरहा ही खतरनाक होते है जोकि गंभीर बीमारिया उत्‍पन्‍न करने के साथ-साथ प्राणी की जान भी ले सकता हैं।

How did the corona virus start?

कोरोनो वायरस की शुरुआत कैसे हुई?

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन WHO के मुताबिक यह वायरस seafood 'सीफूड'  से जुड़ा हुआ हैं। और इस वायरस की सुरूआत भी चायना chain  के हुबेेेेई hubei प्रांत के वुहान wuhan शहर के एक seafood सीफूड बाजार से ही मानी जा रही हैं। वैसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस वायरस का शिकार इंसान ही नहीं बल्कि इसका शिकार ऊँट, बिल्‍ली और सुअर समित कई सारे पशु भी हो रहें हैं। यह वायरस एक व्‍यक्ति या पशुआ से दूसरे व्‍यक्ति में सक्रंमण के जरिये फैलता हैं। 
समुद्री जीव जंतुओ के जरिये ये वायरस चीन के लोगो में फैला हालाकि कुछ स्‍टडी में इस वायरस का स्रोत चमगादड़ एवं सॉंपो को भी बताया गया। चमगादड़ एक ऐसा जीव है जिसमे SARS और MERS सिण्‍ड्रोम दोनो तरहा का कोरोना वायरस होता है। तो इससे आप अंदाजा लगा ही सकते है ‍कि ये वायरस जानवरों से इंसानों में प्रवेश कर रहे हैं। कोरोना वायरस की वजह से दुनिया भर में इसका डर बैठ गया हैं। इस वायरस को 'वुहान वायरस' या फिर COVID-19 भी कहा जा रहा हैं क्‍योंकि इस वायरस की सुरूआत चीन के वुहान शहर में से हुई हैं। चीन के वुहान शहर से फैला यहा वायरस अब दूसरे देशों में भी दाखिल हो चुका हैं। वुहान के बाद ये वायरस शंगहाई, मकाऊ और हांगकांग पहुँचा और लोग इस वायरस से संक्रमित होने लगे। चायना के बाद ये वायरस थाईलेण्‍ड, जापान, आस्‍ट्रैलिया, अमेरिका, ताईवान, सिंगापुर, मलेशिया, फ्रांस, वियेतनाम और भारत तक भी पहुँच चुका हैं। दुनिया भर में यह वायरस चीन से आने वाले यात्रियों के जरिये ही पहुंचा हैं। 

How many people have died from corona virus?

कोरोना वायरस से कितने लोग मारे गए हैं?

WHO की दिनॉंक 15/03/2020 की situation report - 55 के मुताबिक चायना के वुहान में फैले कोरोना वायरस की वजह से अब तक अकेेले चायना में ही 81,048 लोगो को इस संक्रमण से संक्रिमित पाया गया है। और जिनमें से 3,204 लोगो की अब तक इस संक्रमण से मौत हो चुकी है।और चीन समित पूरी दुनिया में इस रोग से पीडि़त कुल मरीजों की संख्‍या 1,53,517 लोगो को संक्रमित पाया गया है जबकि इनमें से 5,735 लोगो की मौत भी इस वायरस के संक्रमण से हो चुकी हैं। और लगभग 143 देशो में इस वायरस के फैल जाने की आशंका लगायी गयी है। 

How to get tested for corona virus?

कोरोना वायरस के लिए परीक्षण कैसे करें ?

कोरोना वायरस कि वजह से श्‍वसन तंत्र में हल्‍का इन्‍फेकसन हो जाता है। जैसा की आम तौर पर सामान्‍य सर्दी-जुखाम में देखने को मिलता है। इसके अलावा वायरस के मरीजों में 

1. खासी और कफ 
2. गले में दर्द
3. सॉस लेने में दिक्‍कत
4. नाक का लगातार वहना
5. सर मे दर्द
6. तेज बुखार

जैसे सुरूआती लक्षण देखे जाते हैं। इसके बाद ये लक्षण निमोनिया में बदल जाते हैं। और किडनी को नुकसान पहुँचाते हैं। इसमे फैफड़े मे गंभीर किस्‍म का संक्रमण भी हो जाता है। वैसे जिन लोगो का इम्‍यून सिस्‍टम immune system कमजोर रहता हैं। जैसे बड़े बुजुर्गो और छोटे बच्‍चो में, उनमें वायरस अटैक होने के चान्‍स ज्‍यादा होते है। और वायरस अटैक होने के बाद उनके शरीर को गंभीर बीमारिया अपनी चपेट में ले लेती है। तो लक्षण जानने के बाद में ये जानना बहुत जरूरी है कि आखिर कोरोना वायरस से कैसे बचा जाए। तो चलिए जानते हैं कि कोरोना वायरस से कैसे बचा जाये।

How to prevent corona virus?

कोरोना वायरस को कैसे रोकें?

तो कोरोना वायरस में किसी भी तरहा की एण्‍टी वायोटिक दवाई काम नहीं करती है। फ्लू में दी जाने वाली वायोटिक्‍स भी इस वायरस को कम करने में काम नहीं करती हैं। अभी तक  इस वायरस से निजाद पाने के लिए कोई भी वैकसीन नही बनायी गयी हैं। इस वायरस से निजाद पाने के लिए वैकसीन बनाने का काम वैज्ञानिक कर रहें है। WHO डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताबिक इस वायरस से बचने का कोई भी विशेष तरीका अभी तक नहीं खोजा गया हैं। लेकिन कुछ सावधानी बरत कर इस वायरस की चपेट में आने से बच सकते है और यही इस वायरस का सबसे बेहतर उपाय हैं। तो चलिए उन सावधानियों के बारे में जानते हैं। 


1. सबसे पहली बात यह है कि seafood को खाने से, दूर ही रहने की कोशिश करे क्‍योकि ये वायरस समुद्री जीवों के जरीये ही इंसानो तक पहुँचा है। तो हो सकता है वायरस से सक्रंमित समुद्री जीव चीन से दूसरे देशो में भी प्रवेश कर चुकें हो इसलिए कुछ दिनों तक मछली या दूसरे समुदाय के समुद्री जीवो को खाने से बचे ।

2. दूसरी सावधानी यह है कि कोरोना वायरस से बचने का सबसे अच्‍छा तरीका है साफ सफाई इसलिए खाने से पहले अपने हाथ अच्‍छी तरहा धो ले और अपने आप को जितना हो सके साफ रखे।3. तीसरा तरीका यह है की खासने के दौरान अपने मुँह और नाक को किसी कपड़े से अच्‍छी तरहा ढ़के।
4. चौथी बात सर्दी और फ्लू के लक्षण होने पर डॉक्‍टर से तुरंत सम्‍पर्क करे। 
5. अण्‍डे और मॉस को अच्‍छी तरहा से पका कर ही खाये। कोशिश करे की किसी भी जानवर के आप सीधे सम्‍पर्क में ना आये।
6. बाहर से घर में आते ही अपने हाथों को अच्‍छी तरहा साबुन, सेनेटाईजर तथा पानी से धोये। तथा अपनी ऑखों ओर नाक को बार-बार अपने हाथों कि अगूँलीयों से ना छुए। 
7. जिन्‍हें सर्दी या फ्लू, जैसे लक्षण हो उनके सम्‍पर्क में आने से बचे। ओर बीमार लोगों से दूरी बनाये और उनके बर्तनों में खाना खाने से बचे और बीमार व्‍यक्तियों को बार बार न छुये। इससे मरीज ओर आप दोनों ही सुरक्षित रहेंगे। 
8. जिन देशों या जगहो पर इस वायरस का प्रकोप फैला हुआ हैं। उन जगहो पर यात्रा करने एवं जाने से बचे चाहें कितना भी जरूरी काम ही क्‍यो ना हो। 
9. घर के आस पास यात्रा करते समय मास्‍क जरुर पहने हैं। 


और अगर किसी व्‍यक्ति पर इस वायरस का असर आ चुका है तो बीमार मरीज को सही चिकित्‍सा देने की आवश्‍यकता हैं। इसके अलावा इसका इलाज सामान्‍य सर्दी की बीमारी की तरहा ही होता है जिसमें मरीज को आराम करने की सलाह दी जाती हैं। तथा तरल पदार्थो का सेवन करने की सलाह दी जाती हैं। और बुखार एवं सर्दी की दवा भी दी जाती हैं और इस तरहा वायरस को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता हैं। 

Mar 13, 2020

indian history in hindi

March 13, 2020

indian history in hindi

indian history in hindi मतलब भारत का इतिहास हिन्‍दी में  दोस्‍तों जैसा की आप इस title को पढकर समझ ही गये हो की आज हम बात करने वाले हैं indian history की ओर इसमें भी हम बात करेंगे ancient indian history in hindi जी हॉं। आज हम बात करने जा रहे हैं प्राचीन भारतीय इतिहास हिन्‍दी में ओर इसी बीच हम अनेक अच्‍‍छी बात को भी जानने की कोशिश करेंगे जो हमारे ancient indian history in hindi के general knowledge को तो बढ़ायेगा ही और साथ-ही-साथ हमें general knowledge quiz, general knowledge question answer, को भी solve करने में भी मदद करेंगा और जोकि general knowledge in hindi के हिसाब से काफी महत्‍वपूर्ण होगा। तो चलिए जानते है indian history in hindi  भारत का इतिहास हिन्‍दी में। 
indian history in hindi
indian history in hindi

उत्‍तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में समुद्र तक फैला यह उपमहाद्वीप भारतवर्ष के नाम से जाना जाता है, जिसे महाकाव्‍य तथा पुराणों में भारतवर्ष अर्थात् 'भरत का देश' तथा यहॉं के निवासियों को भारती अर्थात् 'भरत की संतान' कहा गया है। युनानियों ने भारत को इंडिया तथा मध्‍यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने 'हिन्‍द' अथवा 'हिन्‍दुस्‍तान' के नाम से संबोधित किया है। indian history भारतीय इतिहास को अध्‍ययन की सुविधा के लिए तीन भागों में बॉंटा गया है- ancient india प्राचीन भारत, medieval india मध्‍यकालीन भारत, modern india आधुनिक भारत। तथा उपलब्‍ध सामग्रीयों के आधार पर प्राचीन भारतीय इतिहास ancient indian history के पुरातात्विक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक घटनाओं की जानकारी प्राप्‍त होती हैं। और प्राचीन भारतीय इतिहास Ancient indian history को स्रोतो की विविधता के आधार पर तीन भागों में बाटा गया है-

prehistoric period प्रागैतिहासिक काल 

semi historical period आर्द्ध एतिहासिक काल

historical period एतिहासिक काल

दोस्‍तों इससे पहले की हम आगे ओर अधिक जाने। हमें एक चीज का ज्ञान होना काफी आवश्‍यक है ओर वह है कि हमें ''ईसा पूर्व एवं ईसा'' में अन्‍तर पता होना चाहिए तो चलिए जानते हैं। कि ईसा पूर्व और ईसा में आखिर अन्‍तर है क्‍या? तो में आपको बता दू कि वर्तमान में प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर (Christian calendar/Julian calendar) ईसाई धर्मगुरू ईसा मसीह के जन्‍म-वर्ष(कल्पित) पर आधारित है। ईसा मसीह के जन्‍म के पहले के समय को ईसा पूर्व (B.C.-Before the birht of Jesus Chirst) कहा जाता है। तथा ईसा मसीह की जन्‍म-तिथि से आरंभ हुआ सन्, ईसवी सन् कहलाता है, इसके लिए संक्षेप में ई. लिखा जाता है। ई. को लैटिन भाषा के शब्‍द A.D.में भी लिखा जाता है।  A.D. यानी  Anno Domini का शाब्दिक अर्थ हैं- In the year of lord (Jesus Chirst)
indian history in hindi
ancient indian history in hindi

prehistoric period प्रागैतिहासिक काल

perhistoric period इतिहास का वह कालखण्‍ड जिसके विषय में जानकारी का एक मात्र स्रोत पुरातत्‍व है। इस काल के विषय में लिखित प्रमाण उपलब्‍ध नही हैं। तथा इस काल को मानव उत्‍पत्ति से 3000 ईसा पूर्व तक माना जाता हैं। 

semi historical period आर्द्ध एतिहासिक काल

semi historical period इतिहास का वह कालखण्‍ड जिसके विषय में ‍लिखित साम्रग्री उपलब्‍ध किन्‍तु उसे पड़ा नही जा सकता हैं। तथा इस काल को 3000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तक माना जाता हैं। जैसे- सिंधु घाटी सभ्‍यता। 

historical period एतिहासिक काल

historical period इतिहास का वह काल जिसके विषय में लिखित प्रमाण उपलब्‍ध है तथा जिन्‍हे पड़ा भी जा सकता हैं। जैंसे - अशोक के अभिलेख इत्‍यादि।  
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तो दोस्‍तो ये तो हुई indian history in hindi (भारत का इतिहास हिन्‍दी में) की बात अध्‍ययन की दृष्टि से परन्‍तु indian history in hindi (भारत का इतिहास हिन्‍दी में) को स्रोतो के आधार पर भी वर्गीकृत किया गया हैं। जोकि इस प्रकार हैं। 

प्राचीन भारतीय इतिहास हिन्‍दी में ancient indian history in hindi के विषय में जानकारी मुख्‍यत: चार स्रोतों से प्राप्‍त होती है- धर्मग्रंथ, ऐतिहासिक ग्रंथ, विदेशियों का विवरण, पुरातत्‍व संबंधी साक्ष्‍य।

धर्मग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथ से मिलने वाली महत्‍वपूर्ण जानकारी
भारत का सर्वप्राचीन धर्मग्रंथ वेद है, जिसके संकलनकर्ता महर्षि कृष्‍ण द्वैपायन वेदव्‍यास को माना जाता है। वेद चार हैं- ऋग्‍वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद। 
ऋग्‍वेद- ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्‍वेद कहा जाता है। इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्‍त एवं 10,462 ऋचाऍं हैं। तथा इस वेद के ऋचाओं के पढ़ने वाले ऋषि को 'होतृ' कहते हैं। 
यजुर्वेद- सस्‍वर पाठो के लिए मंत्रों तथा बलि के समय अनुपालन के लिए नियमों का संकलन यजुर्वेद कहलाता है। तथा इसके पाठकर्ता को 'अध्‍वर्यु' कहते हैं।
सामवेद- यह गायी जा सकने वाली ऋचाओं का संकलन है। इसके पाठकर्ता को उद्रातृ' कहते हैं। तथा इसे भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है। 
अर्थवेद- अथर्वा ऋषि द्वारा रचित इस वेद में रोग, निवारण, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, शाप, वशीकरण, आशीर्वाद, स्‍तुति, प्रायश्चित, औषधि, अनुसंधान, ‍विवाह, प्रेम, राजकर्म, मातृभूमि-महात्‍मय आदि ‍विविध विषयों से संबद्ध मंत्र तथा सामान्‍य मनुष्‍यों के ‍विचारों, विश्‍वासों, अंधविश्‍वासों इत्‍यादि का वर्णन है। 

विदेशी यात्रियों से ‍मिलनेवाली प्रमुख जानकारी 
इसे भी अलग-अलग रूप से विभाजित किया गया है जैसे- यूनानी-रोमन लेखक, चीनी लेखक, अरबी लेखक। चलिए हम एक-एक करके समझते हैं।
यूनानी-रोमन लेखक- यूनानी-रोमन लेखक अनेक थे जिन्‍होंने भारत के बारे में काफी कुछ लिखा है और सभी ने अपने-अपने नजरिये से भारत का ‍विवरण ‍दिया हैं। उनमें से कुछ के नाम कुछ इस प्रकार है- टेसियस, हेरोडोटस, ‍निर्याकस, आनेसिक्रटस, आस्टिोबुलस, मेगास्‍थनीज, डाइमेकस,डायोनिसियस, टॉलमी, प्लिनी तथा पेरीप्‍ल ऑफ द इरिथ्रयन-सी इत्‍यादि। 
चीनी लेखक- यूनानी लेखको की तरहा ही अनेक चीनी लेखक भी भारत आये जैसे- फाहियान, संयुगन, हृेनसॉंग तथा इत्सिंग इत्‍यादि। 
अरबी लेखक- अरबी लेखको में मुख्‍य रूप से अलबरूनी एवं इब्‍न बतूता ही महत्‍वपूर्ण हैं। 
इन सभी के अलावा भी कई लेखक है। जैसे- तारानाथ तथा मार्कोपोलो इत्‍यादि।

पुरातत्‍व संबंधी साक्ष्‍य से मिलनेवाली जानकारी 
पुरातात्विक स्रोतो के अन्‍तर्गत अभिलेख, स्‍मारक एवं भवन, मुद्राये, मूर्तिया, चित्रकला एवं मोहरे इत्‍यादि शामिल हैं। प्राचीनतम सिक्‍के आहृत सिक्‍के कहलाते थे। तथा भारत में प्राचीनतम स्‍मारक एवं भवन हड़प्‍पा एवं मोहन जोदड़ो से प्राप्‍त हुऍं हैं। और भारत में प्राचीनतम स्‍मारक बौद्ध धर्म से संबंधित है जिसमें मुख्‍यत: स्‍तूप, बिहार एवं चेत्‍य शामिल हैं। तथा भारत में प्राचीनतम उपलब्‍ध मूर्तिया सिन्‍धु सभ्‍यता से प्राप्‍त मानी जाती हैं। मोहरे मुख्‍यत: ‍सिन्‍धु सभ्‍यता से संबंधित हैं। ‍सिंधु सभ्‍यता के इतिहास लेखन में मोहरे सर्वाधिक महत्‍व रखती हैं।

तो दोस्‍तो अभी तक हमने indian history in hindi भारत का इतिहास हिन्‍दी में को अध्‍ययन एवं स्रोतो की दृष्टि से समझा परन्‍तु अभी हमे थोड़ा और समझने की जरूरत हैं। तो चलिए prehistoric period, semi historical period और historical period को थोड़ा और समझते है। 


1. prehistoric period प्रागैतिहासिक काल 
मानव के उद्भव का समय लगभग 14 लाख ई.पू. से 10 लाख ई.पू. के बीच माना जाता है। आधुनिक मानव होमोसेपियन्‍स का प्राद्रुुुुुुभाव लगभग 30 हजार ई.पू. मानी जाती है। प्रागैतिहासिक काल को तीन भागों में विभाजित किया गया हैं- पुरा पाषाण काल palaeolithic age, मध्‍य पाषाण काल mid-stone age, नव पाषाण काल new stone age
indian history in hindi
prehistoric period


palaeolithic age पुरा पाषाण काल- 

प्रारम्‍भ से 10 हजार ई.पू. तक। भारत में प्रथमत: 'राबर्ड ब्रूश फुट' 1863 ने मद्रास के पास 'पल्‍लवरम्' से पुरा पाषाण कालीन उपकरण प्राप्‍त किये। 

mid-stone age मध्‍य पाषाण काल- 

10 हजार से 4 हजार ई.पू. तक। सूूक्ष्‍म पाषाण उपकरण की प्राप्ति के कारण इसे 'माइक्रो लिथिक ऐज' भी कहा जाता हैं। 

new stone age नव पाषाण काल- 

7 हजार से 1 हजार ई.पू. तक। कृषि के प्राचीनतम प्रमाण भी इसी काल में प्राप्‍त हुई। वर्तमान भारत में मिर्जापुर जिले में स्थित कोल्‍डी हवा (5 हजार ई.पू.) में चावल के दाने प्राप्‍त हुए। 
ताम्र पाषाण काल- 4 हजार ई.पू. से 1 हजार ई.पू तक। धातु उपयोग का काल भी कहा जाता हैं। तथा प्रथमत: नगरीयकृत स्‍थल भी प्राप्‍त होतेे है।

2. semi historical period आर्द्ध एतिहासिक काल
आर्द्ध एतिहासिक काल इतिहास का वह कालखण्‍ड जिसका सबसे अच्‍छा उदाहरण सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता को माना जा सकता है। 
सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के विषय में सर्वप्रथम सूचना 1826 में 'चाल्‍स मेसोन' ने दी। परन्‍तु इसकी प्रथमत: खुदाई 1856 में की गई। 1921 में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष 'सर जॉन मार्सल' के नेतृत्‍व में 'दयाराम सहानी' ने उत्‍खन्‍न कर 'हड़प्‍पा' की खाेेेज की । इस कारण ही प्रथमत: इसका नाम हड़प्‍पा सभ्‍यता रखा गया। 
1922 में 'राखाल दास बेनर्जी' द्वारा सिन्‍ध क्षेत्र में 'मोहनजोदड़ो' की खोज की गई।
  
3. historical period एतिहासिक काल 
historical period you want to know more about ऐतिहासिक काल जिसके बारे में आप अधिक जानना चाहते हैंं उस काल का प्रारम्‍भ मुख्‍य रूप से महाजनपद काल से होता हैं क्‍योंकि इस समय राज्‍य निर्माण का प्रारम्‍भ, लोहे का व्‍यापक प्रयोग, व्‍यापार, वाणिज्‍य का प्रारम्‍भ, नवीन धर्मो का उदय का काल एवंं नगरीयकरण का प्रारम्‍भ होता हैं।  
दोस्‍तो मैं उम्‍मीद करता हूँ की indian history in hindi भारत का इतिहास हिन्‍दी में का यह लेख आपको काफी अच्‍छा लगा होगा और इस लेख को पढ़कर आपके काफी प्रश्‍नों के उत्‍तर भी आपको मिल गयेे हो। 
धन्‍यवाद।

Mar 8, 2020

current affairs of india

March 08, 2020

Current affairs


मानव विकास सूचकांक-2018 जारी

  • मानव विकास सूचकांक (ह्यूमन डिवेलपमेंट इंडेक्स) के मामले में इस बार भारत की रैकिंग में एक पायदान का सुधार हुआ है।
  • बता दें, कि भारत अब 189 देशों के बीच 130वें नंबर पर पहुंच गया है।
  • साल 2017 के लिए भारत का एचडीआई मूल्य 0.640 रहा है, इसी के चलते भारत को मानव विकास श्रेणी में रखा गया है।
  • वर्ष 1990 से 2017 के बीच में भारत के एचडीआई वैल्यू में 0.427 से लेकर 0.640 की वृद्धि हुई है।
  • इसमें करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस सूची में बांग्लादेश 136वें और पाकिस्तान 150वें नंबर पर है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सकल राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय 1990 से 2017 के बीच 266.6 प्रतिशत बढ़ गई, लेकिन एचडीआई मूल्य का करीब 26.8 प्रतिशत असमानताओं की वजह से कम हो जाता है।

16 सितंबर को मनाया गया विश्व ओजोन दिवस

  • विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस हर साल 16 सितंबर को दुनियाभर में मनाया जाता है।
  • ओजोन परत ओजोन अणुओं की एक परत है जो विशेष रूप से 20 से 40 किलोमीटर के बीच के वायुमंडल के समताप मंडल परत में पाई जाती है।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार -2018 की घोषणा की गई

  • भारत में इस साल के राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की घोषणा की गई जिसके तहत मीराबाई चानू और विराट कोहली को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
  • बता दे, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार खिलाड़ियों को पिछले चार साल के उत्कृष्ट प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए दिया जाता है।
  • इस पुरस्कार में सम्मान पत्र के अलावा साढ़े सात लाख रुपये नकद दिया जाता है।
  • वहीं, अर्जुन पुरस्कार के लिए चार साल तक लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को चुना जाता है।
  • इसके विजेता अवार्ड के अलावा पांच लाख रुपये नकद दिए जाते हैं।
  • द्रोणाचार्य पुरस्कार केवल उन कोच को दिया जाता है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में मेडल जीतने वाले खिलाड़ी दिए हैं।
  • ध्यानचंद पुरस्कार लंबे वक़्त तक खेल के क्षेत्र में काम करने और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार उन कंपनियों (सरकारी और प्राइवेट) को दिया जाता है, जिन्होंने खेलों के प्रचार-प्रसार और विकास में योगदान दिया है।
  • द्रोणाचार्य और ध्यानचंद अवार्ड से सम्मानित लोगों को सम्मान के साथ पांच-पांच लाख रुपये दिए जाते हैं।
  • सम्मानित खिलाड़ियों को राष्ट्रपति 25 सितंबर, 2018 को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित करेंगे।
  • इससे पहले यह खिताब महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (1997) और दो बार विश्व कप जीतने वाले पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धौनी (2007) को मिला है।
  • पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के कारण इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए मीराबाई के नाम की सिफारिश की गई है। उन्होंने इस साल राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीला तमगा हासिल किया था, लेकिन चोट के कारण एशियाई खेलों में भाग नहीं ले सकी।
  • कोहली के नाम 71 टेस्ट मैचों में 23 शतकों के साथ 6147 रन हैं जबकि 211 एकदिवसीय में उन्होंने 9779 रन बनाये हैं जिसमें 35 शतक शामिल हैं।

मुताज मूसा अब्दुल्ला बने सूडान के नए प्रधानमंत्री

  • मुताज मूसा अब्दुल्ला ने सूडान के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
  • नए प्रधानमंत्री मुताज मूसा अब्दुल्ला के पास वित्त मंत्रालय का भी प्रभार है।

भारत-बांग्‍लादेश पेट्रोलियम पाइपलाइन निर्माण परियोजना का शुभारंभ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वीडियो कांफ्रेस के जरिये भारत-बंगलादेश मैत्री पाइपलाइन परियोजना के निर्माण का संयुक्त रूप से शुभारंभ किया।
  • बता दें, दोनों देशों के बीच, इस वर्ष अप्रैल में विदेश सचिव विजय गोखले की ढाका यात्रा के दौरान पैट्रोलियम पाइपलाइन निर्माण का यह समझौता हुआ था।
  • एक सौ तीस किलोमीटर लम्बी यह पाइपलाइन भारत में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और बांग्लादेश में दिनाजपुर जिले के पार्बतीपुर को जोड़ेगी।
  • इस परियोजना की अनुमानित लागत 346 करोड़ रुपये होगी और इसे तीस महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • पाइपलाइन परियोजना का छह किलोमीटर हिस्सा भारत में होगा जबकि एक सौ चौबीस किलोमीटर पाइपलाइन बांग्लादेश में होगी।

केन्‍द्र का बैंक आफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय का प्रस्‍ताव

  • सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय का प्रस्‍ताव किया है।
  • योजना की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे बैंक और मजबूत होंगे तथा उनकी कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी।

भारत की पहली आईएएस अधिकारी नहीं रही

  • आजाद भारत की पहली महिला आईएएस अधिकारी अन्ना मल्होत्रा का 91 वर्ष की आयु में 17 सितम्बर को मुंबई में निधन हो गया।
  • साल 1989 में उन्हें भारत सरकार के नागरिक सम्मान पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • अन्ना मल्होत्रा ने साल 1951 में भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा पास की और अपनी सेवाएं देने के लिए तमिलनाडु कैडर को चुना।
  • अन्ना को मुंबई के नजदीक देश के आधुनिक बंदरगाह जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) की स्थापना में योगदान के लिए जाना जाता है।

शीतलन कार्य योजना जारी करने के लिए दुनिया का पहला देश बना भारत

  • इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (आईसीएपी) के मसौदे को एक हरित निकाय ने ‘‘पूरी तरह अपर्याप्त’’ करार दिया और उसका दायरा सीमित बताते हुए इसे खारिज कर दिया।
  • आईसीएपी में उन कार्यों को सूचीबद्ध किया गया जो कूलिंग की मांग कम करने और उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने आईसीएपी में तत्काल संशोधन के लिए भी कहा।
  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन सिंह ने विश्व ओजोन दिवस कार्यक्रम के दौरान आईसीएपी का मसौदा जारी किया।
  • सीएसई की कार्यकारी निदेशक- रिसर्च एवं एडवोकेसी अनुमिता रॉय चौधरी है।

बीएआरसी निदेशक के एन व्यास परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष नियुक्त

  • प्रसिद्ध वैज्ञानिक कमलेश निलकांत व्यास परमाणु ऊर्जा विभाग और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।
  • कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने अपनी नियुक्ति को तब तक के लिए मंजूरी दे दी है जब तक वह 64 साल की उम्र प्राप्त नहीं कर लेते, यानी 3 मई, 2021 तक के लिए।
  • व्यास, जोकि वर्तमान में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के निदेशक हैं, इन्हे शेखर बसु के स्थान पर नियुक्त किया गया है।
  • बसु को अक्टूबर 2015 में इस पद पर नियुक्त किया गया था और उनका कार्यकाल सितंबर 2016 में समाप्त हुआ था।
  • हालांकि, उन्हें एक-एक वर्ष का दो विस्तार (extension) दिया गया, एक 2016 में और दूसरा 2017 में।

बुकर पुरस्कार : डेजी जॉनसन बनी सबसे काम उम्र की लेखिका

  • ब्रिटिश लेखिका डेजी जॉनसन, मां-बेटी वाले अपने उपन्यास ‘एवरीथिंग अंडर’ को लेकर 2018 के प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार के लिए 20 सितम्बर को अंतिम दौड़ में पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की लेखिका बन गयीं। डेजी 27 साल की हैं।
  • इसके अलावा ब्रिटिश लेखक एन्ना बर्न ने ‘मिल्कमैन’ और रोबिन रॉबर्टसन ने ‘द लांग लेक’ कृति को लेकर इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के आखिरी दावेदारों में अपनी जगह बनायी है।
  • अंतिम दौड़ में जगह बनाने वाले अमेरिकी लेखक राशेल कुशनर और रिचर्ड पावर्स हैं। उनकी कृतियां क्रमश: ‘द मार्स रुम’ और ‘द ओवरस्टोरी’ हैं।
  • बता दें, इस पुरस्कार की घोषणा 16 ऑक्टूबर को की जाएगी। इसमें विजेता को 50,000 पाउंड दिये जाते हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री ने महिला सुरक्षा सुदृढ़ करने के लिए दो पोर्टल लॉन्च किए

  •  केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में महिला सुरक्षा सुदृढ़ करने के लिए दो अलग-अलग पोर्टल लॉन्च किए।
  • पोर्टल “cybercrime.gov.in” चाइल्ड पोर्नोग्राफी, बाल यौन उत्पीड़न सामग्री, दुष्कर्म एवं सामूहिक दुष्कर्म जैसी यौन रूप से संबंधित आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट पर नागरिकों से शिकायतें प्राप्त करेगा।
  • इनमें सख्त सजा का प्रावधान एवं जांच में सुधार लाने के लिए आधुनिक फोरेंसिक सुविधाओं का सृजन, गृह मामले मंत्रालय में महिला सुरक्षा प्रभाग की स्थापना एवं महिलाओं की सुरक्षा के लिए सुरक्षित नगर परियोजनाएं शुरू किया जाएगा।
  • दोनों पोर्टल विशेष रूप से ऐसी जांचों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बेहद सहायक होगा, जिनमें अपराधी अपराध करने के बाद दूसरे राज्यों में भाग जाते हैं।
  • महिला एवं बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी) पोर्टल सुविधाजनक और उपयोग में आसान है जो शिकायतकर्ताओं को बिना उनकी पहचान जाहिर किए शिकायत दर्ज कराने में सहायता करेगा।
  • वहीं, दूसरा पोर्टल यौन अपराधियों पर राष्ट्रीय डाटाबेस (एनडीएसओ) से संबंधित है। यह देश में ‘यौन अपराधियों’ पर एक केंद्रीय डाटाबेस है, जिसका रखरखाव नियमित निगरानी के लिए एनसीआरबी द्वारा किया जाएगा एवं राज्य पुलिस द्वारा इसकी ट्रैकिंग की जाएगी।

बहुआयामी गरीबी सूचकांक जारी

  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (ओपीएचआई) द्वारा जारी 2018 विश्वव्यापी बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के अनुसार पिछले 10 वर्षों में भारत में बहुआयामी गरीबों की संख्या घटकर लगभग आधी हो गई है। यह 54.7 प्रतिशत से गिरकर 27.5 प्रतिशत हो गई है।
  • गरीबी में रहने वाले सभी लोगों में से आधे 18 साल से कम उम्र के हैं।
  • 2018 की रिपोर्ट ने 105 देशों के लिए डेटा प्रदान किया, जो दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत आबादी को कवर करती है।
  • बहुआयामी गरीबी के लिहाज से देखा जाए तो दक्षिण एशियाई देशों में सिर्फ मालदीव की स्थिति भारत से अच्छी है।

टीएन सरकार ने नीला कुरुंजी की सुरक्षा के लिए योजना की घोषणा की

  • तमिलनाडु सरकार ने नीला कुरुंजी (स्ट्रोबिलेंथेस कुंथियानस) पौधों की सुरक्षा के लिए नावेल योजना की घोषणा की है।
  • बता दें Strobilanthus kunthianus यानी नीला कुरुंजी के फूल 12 साल में केवल एक बार खिलते हैं।
  • शिकायतों के बाद भी इन दुर्लभ फूलों को वाणिज्यिक आधार पर बेचा जा रहा है, राज्य विभाग ने चेतावनी दी है कि ऐसे अपराधियों पर सख्त जुर्माना लगाया जाएगा।
  • यह फूल विदेशिओं और मूल पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है और पर्यटन से विदेशी मुद्रा कमाई का माध्यम है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिमी ओडिशा के पहले हवाई अड्डे का उद्घाटन किया

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितम्बर को ओडिशा के झरसुगुडा में पश्चिमी ओडिशा के पहले हवाई अड्डे और तालचेर में एक उर्वरक संयंत्र समेत कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की।
  • यह भारत का पहला ऐसा संयंत्र होगा, जिसमें कोयले की गैस पर आधारित उर्वरक इकाई होगी। इस संयंत्र में प्राकृतिक गैस का उत्पादन भी किया जाएगा।
  • संयंत्र का निर्माण उर्वरक निगम ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
  • इस हवाई अड्डे से केंद्र सरकार की उड़ान योजना के माध्यम से क्षेत्रीय हवाई सेवाएं शुरू की जा सकेंगी।

bharat me european companiyon ka aagman pdf

March 08, 2020

भारत में यूरोपीय कंपनियों  का आगमन 
The arrival of European companies in India

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन pdf
flag of european countries

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन 15 वी शताब्‍दी के मध्‍यकाल में हुआ क्‍योंकि 15 वी शताब्दी तक यूरोप में नई भौगोलिक खोजो जैसे दिशा सूचक यंत्र तथा जहाज नर्माण आदि ने भौगोलिक खोजो को प्रोत्साहित किया। भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक संम्पन्नता, आध्यात्मिक उपलब्धियां, दर्शन, कला आदि से प्रभावित होकर मध्यकाल में बहुत से व्यापारियों एवं यात्रियों का यहाँ आगमन हुआ । 1488 ई०  में भारत आने के लिये केव ऑफ गुडहोप होकर एक नए सामुद्रिक मार्ग की खोज बार्थोलोम्यो डियाज द्वारा की गई। इसी क्रम में 1492 ई० में स्पेन का एक नाविक कोलम्बस भारत की खोज में निकला किन्तु भटककर अमेरिका पहुँच गया। ओर इस तरहा 1492 ई० में अमेरिका की खोज हुई। परन्तु अभी भी सभी यूरोपियन भारत को खोजने में असफल रहे। किन्तु ये इंतेज़ार अब खतम होने वाला था ओर 1498 ई० में वास्कोडिगामा भारत की खोज करने में सफल रहा। ओर इस तरहा 1498 ई० में भारत की खोज हुई।

Portuguess in india( भारत में पुर्तगाली ):-

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन pdf
portugess flag

प्रथम पुर्तगाली यात्री वास्कोडिगामा 17 मई, 1498 ई० को एक गुजराती व्यपारी अब्दुल मजीर की सहायता से भारत के कालीकट पहुँचा। वास्कोडिगामा का स्वागत कालीकट के तत्कालीन शाशक जमोरिन (यह कालीकट के शाशक की उपाधि थी) द्वारा किया गया । तत्कालीन भारतीय व्यापर पर अधिकार रखें वाले अरब व्यापारियों को जमोरिन का यह व्यवहार पसंद नहीं आया , अतः उनके द्वारा पुर्तगालियों का विरोध किया गया । इस प्रकार हम देखते है के पुर्तगालियों के भारत आगमन से भारत एवं यूरोप के मध्य व्यापार के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात हुआ । भारत आने और जाने में हुए यात्रा व्यय के बदले में वास्कोडिगामा ने करीब 60 गुना अधिक धन कमाया ।
1596 ई० में कर्नेलिस-डि-हाऊटमैन (Cornelis de Houtman) भारत आने वाला प्रथम डच नागरिक था। 1602 ई० में भारत आने वाली पुर्तगाली कम्पनी का नाम इस्तदो-डी-इण्डिया था। तथा प्रथम फेक्ट्री कोचीन में 1503 ई० स्थापित की। ओर इसी क्रम में पुर्तगाली कम्पनी के कई गवर्नर भारत आये जिनमें से प्रथम पुर्तगाली गर्वनर जो भारत आये वे थे फ्रांसिस्को-डी-अल्मीडा जो 1505 ई० में भारत आये। ओर जिनका कार्यकाल1509 तक रहा। इन्होंने blue water polishe को प्रारंभ किया जोकि एक सामुद्रिक नीति थी। अल्मीडा के बाद अगले पुर्तगाली गवर्नर जो भारत आये वे थे अल्फांसो-डी-अल्बुकर्क जो 1509 ई० में भारत आये ओर लगभग 1514 ई० तक भारत में पुर्तगालियों के गवर्नर के रूप में भारत मे रहे। 1510 ई० में अल्बुकर्क ने वीजापुर के शासक से गोवा जीत लिया। अल्बुकर्क के बाद के गवर्नर्स ने भारत में बम्बई, दमन एवं द्वीप , साष्टि एवं हुगली पर अपना कब्जा किया। किन्तु ये सभी क्षेत्र इनके पास अधिक समय तक नहीं रह सके और जिनमे से अधिकांश क्षेत्र उनके हाथों से निकल गए किन्तु गोवा, दमन एवं दीप पर पुर्तगालियों ने अपना कब्जा 1961 ई० तक बनाये रखा।

Dutch in india( भारत में डच ):-

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन pdf
Dutch flag

पुर्तगालियो के बाद डच भारत आये। डच वर्तमान नीदरलैंड के निवासी थे। 1602 ई० में डच कम्पनी  वेरिगंदे ओस्टिंडिशे कंपनी स्थापित हुई जिसका एक अन्य नाम और था यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी ऑफ़ नीदरलैंड जोकि कई कंपनियों का एक समूह था। डचों ने भारत मे अपनी प्रथम फेक्ट्री 1605 ई० में मसूली पटनम आंध्रप्रदेश में स्थापित की। परन्तु डचों ने अपनी राजधानी नेगापटनम को बनाया था। डच कम्पनी की भारत से अधिक रुचि इंडोनेशिया के मसाला व्यापार में थीं। डचों ने भारत से नील, शोरा एवं सूती वस्त्रो का बहुत अधिक मात्रा में निर्यात किया।

डचों की भारत मे अन्य महत्वपूर्ण फेक्ट्रीयाँ :-

पुलिकट, सूरत, चिनसुरा, नेगापटनम एवं काशिम बाजार।
डचों ने भारत पर लगभग 150 वर्ष व्यपार किया और सन 1759 ई० में बेदरा के युद्ध मे अंग्रेजो ने डचों को अन्तिम रूप से पराजित किया ओर भारतीय व्यपार से अलग कर दिया।



British raj या british in india( ब्रिटिश राज या  भारत में ब्रिटिश ):-

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन pdf
British flag

1599 ई० में जॉन मिलडिन हॉल नामक ब्रिटिश यात्री स्थल मार्ग से भारत आया। तथा 1599 ई० में ही मर्चेंट एडवेंचर्स नामक व्यापारियों के एक दल ने अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना की। ओर इसके बाद 1600 ई० में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ टेलर प्रथम ने कम्पनी को पूर्व के साथ व्यपार के लिए 15 वर्षों के लिए एकाधिकार पत्र प्रदान किया। इसे ही द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट ऑफ इंग्लैंड ट्रेडिंग टू दा ईस्ट इंडीज के नाम से जाना गया तथा संछिप्त में इसे ईस्ट इण्डिया कंपनी कहा गया।
ब्रिटिश राज की भारत मे प्रथम फेक्ट्री 1608 ई० में सूरत में स्थापित हुई। इसके बाद ब्रिटिश राज की एक ओर अन्य फैक्ट्री जोकि दक्षिण भारत की प्रथम फैक्ट्री थी 1611 ई० में मसूलीपटनम में स्थापित हुई। 1632 ई० में गोलकुण्डा के सुल्तान ने अंग्रेजों को एक सुनहला फरमान दिया जिसके अनुसार अंग्रेज सुल्तान को 500 पैगोडा वार्षिक कर देकर गोलकुण्डा राज्य के बंदरगाह पर स्वतंत्रता पूर्वक व्यापार कर सकते थे। 1687 ई० में अंग्रेजों ने पश्चिमी तट का मुख्यालय सूरत से हटा कर बम्बई को बनाया। 1674 ई० में फ्रांसिस मार्टिन ने पांडिचेरी की स्थापना की। 1760 ई० में अंग्रेजी सेना ने सर आयरकूट के नेतृत्व में वान्डीवाश की लड़ाई में फ्रांसीसियों को बुरी तरहा हराया। तथा 1761 ई० में अंग्रेजों ने पांडिचेरी को फ्रांसीसियों से छीन लिया। और 1763 ई० में हुई पेरिस सन्धि के द्वारा  अंग्रेजों ने चंद्रनगर को छोड़कर शेष अन्य प्रदेश को लौटा दिया, जो 1749 ई० तक फ्रांसीसियों के कब्जे में थे, ये प्रदेश भारत की आजादी तक फ्रांसीसियों के कब्जे में रहे।

French in india( भारत में फ्रेंच ):-

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन pdf
French flag

1664 ई० में फ्रांस के सम्राट लुई 14th के वित्त मंत्री कॉलबर्ट ने फ्रेंच ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना की। फ्रांसीसी कम्पनी, फ्रांसीसी सरकार द्वारा स्थापित थी। तथा यह एक प्रकार की सरकारी कम्पनी थी। तथा इस फ्रेंच कम्पनी का नाम "कम्पनी द इंडसे ओरिएंटेड" company the indse oriantd था। भारत में फ्रांसीसियों ने अपनी प्रथम फेक्ट्री सूरत में 1668 ई० में स्थापित की। तथा इस फेक्ट्री के स्थापनकर्ता फ़्रेको कैरो थे। 1673 ई० में फ़्रेको मार्टिन ने बलीकोन्दपुरम के सूबेदार शेर खा लोदी से कुछ गाँव प्राप्त किये जिसे भविष्य में पांडुचेरी के नाम से जाना गया। तथा फ्रांसीसियों द्वारा 1721 ई० में मोरिसस ओर 1721 ई० में माहे पर अधिकार कर लिया गया। इस प्रकार 1740 ई० के बाद भारत मे अंग्रेजों एवं फ्रांसीसियों के मध्य राजनीतिक प्रतिस्पर्धा प्रारम्भ हुई। जिसमें अन्ततः अंग्रेजों की विजय हुई।

Note:- वर्ष 1616 ई० में फ्रांसीसियों से पहले एक डेनिस अर्थात डेनमार्क की एक कम्पनी का भी भारत में आगमन हुआ था। यह कम्पनी अधिक समय तक अंग्रेजों से प्रतिस्पर्धा नही कर पाई और वर्ष 1845 ई० में अपनी समस्त फैक्ट्रियों को अंग्रेजों को बेच कर भारत से चली गयी।
arrival of european companies in india
arrival of european companies in india

Jul 8, 2019

Mughal empire | Aurangzeb Biography

July 08, 2019

 Aurangzeb Biography 

(1658ई० - 1707ई०)

Aurangzeb Biography
Aurangzeb

औरंगज़ेब का जन्म 24 अक्टूबर , 1618 ई० को दोहाद (गुजरात) नामक स्थान पर हुआ था। औरंगज़ेब सुन्नी धर्म को मानता था, तथा इसके व्यक्तिगत चारित्रिक विशेषता के कारण इसे जिन्दा पीर कहा जाता था। इसके गुरु मीर मुहम्मद हकीम थे। औरंगज़ेब के बचपन का अधिकांश समय नूरजहाँ के पास बीता। 18 मई ,1637 ई० को फारस के राजघराने की 'दिलरस बानो बेगम'(राबिया बीबी) के साथ औरंगज़ेब का निकाह हुआ। तथा औरंगज़ेब की एक बेटी महरुनिसा का भी इतिहास में ज़िक्र प्राप्त होता है।
Aurangzeb Biography
राबिया बीबी ओर औरंगजेब

उत्तराधिकारी का संघर्ष 

उत्तराधिकारी का संघर्ष शाहजहाँ के पुत्रों के बीच हुआ था। इस संघर्ष में शाहजहाँ के चारों पुत्रों -
  1. दारासिको 
  2. शाहशुजा
  3. औरंगज़ेब
  4. मुरादबक्च
के बीच मुख्य रूप से पाँच युद्ध हुए।
  1. बहादुरगढ़ का युद्ध
  2. धरमट का युद्ध
  3. सामूगढ़ का युद्ध
  4. खंजवा का युद्ध 
  5. देवराई का युद्ध
इन पाँचो युद्ध मे से देवराई का युद्ध काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि इसी युद्ध मे औरंगज़ेब ने अपने भाई दारासिको को पराजित किया था। तथा 31 जुलाई, 1658 को "अबुल मुजफ्फर मुहउद्दीन मोहम्मद औरंगज़ेब बहादुर आलमगीर बादशाह गाजी" की उपाधि लेकर जल्दबाजी में औरंगज़ेब ने आगर में अपना राज्याभिषेक किया।
देवराई के युद्ध में सफल होने के बाद 15 मई, 1659 को औरंगज़ेब ने दिल्ली में प्रवेश किया और शाहजहाँ के शानदार महल में 5 जून, 1659 को दूसरी बार राज्याभिषेक करवाया।

औरंगज़ेब की महत्वपूर्ण विजय

  • वीजापुर की विजय - 1686 ई० में।
  • गोलकुण्डा की विजय - 1687 ई० में।

औरंगज़ेब की महत्वपूर्ण नीतियाँ 

  • सिक्को पर कलमा बन्द करबाया।
  • झरोखा दर्शन की प्रथा की समाप्ति।
  • 1661 में हिन्दू त्योहारों पर बैन लगाया।
  • दरबार से संगीतकार एवं इतिहासकारो को हटाया गया ।
  • 1679 में मंदिरों को तोड़ने के आदेश दिये।

औरंगज़ेब की मृत्यु

1681 में औरंगज़ेब दक्षिण भारत के अभियान पर गया। और फिर कभी भी दिल्ली वापस नहीं लौटा। तथा इसकी मृत्यु 20 फरवरी , 1707 ई० को ओरंगाबाद में हुई। इसे खुलदाबाद जो अब रोजा कहलाता हैं, में दफ़नाय गया।



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